कोरोना महामारी से जूझ रहे देश में अब तीसरी लहर की तैयारी सरकार ने शुरू कर दी है। संक्रमण की यह लहर कब और कैसे आएगी इसके बारे में अभी तक विज्ञान को भी नहीं पता है, लेकिन सरकार ने जमीनी स्तर पर जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री राहत कोष (पीएम-केयर) फंड के जरिये राज्यों को मिले संसाधनों का ऑडिट भी शुरू हो चुका है।
दिल्ली, मुंबई सहित कुछ महानगरों में यह काफी गोपनीय तरीके से किया जा रहा है जिसमें केंद्र सरकार की एजेंसियां शामिल नहीं हैं। अलग-अलग शहरों में मौजूद ये टीमें हर दिन का डाटा तैयार कर रही हैं जिनमें वेंटिलेटर, बिस्तर, आईसीयू की वर्तमान संख्या और उनके उपयोग के अलावा जांच किट्स इत्यादि के इस्तेमाल पर जानकारी ली जा रही है।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी में पता चला है कि पीएम-केयर फंड के जरिये राज्यों को 38 हजार से अधिक वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए हैं। लेकिन उनमें से काफी वेंटिलेटर संचालित भी नहीं हुए हैं। हाल ही में पंजाब गई केंद्रीय टीम ने भी अपनी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की थी। इन्हीं वेंटिलेटर का सच पता लगाने के लिए टीमें ऑडिट कर रही हैं।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भले ही नए मामले अभी कम हो रहे हों लेकिन अस्पतालों में स्थिति काफी गंभीर है। दो लहर देखने के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि देश में काफी सख्त तैयारियों की आवश्यकता है। इसीलिए अब पूरा ध्यान तीसरी लहर की ओर है। उन्होंने कहा कि शायद लोगों का व्यवहार सही रहा तो अगली लहर न देखने को मिले लेकिन सरकार को अब तैयार रहना ही पड़ेगा।
दरअसल पिछले सप्ताह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को ऑडिट के निर्देश दिए थे। देश की राजधानी दिल्ली से इसकी पहली शुरूआत हुई। यहां के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को फोन करके हर दिन यह डाटा एकत्रित किया जा रहा है कि उनके यहां कितने आईसीयू और वेंटिलेटर बेड खाली पड़े हैं।
ऑडिट करने वाली टीम के एक सदस्य ने बताया कि दिल्ली में अभी पीएम केयर फंड के तहत वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे जोकि जीटीबी और लोकनायक अस्पताल के पास आईसीयू कोविड सेंटर में स्थापित हैं। इनमें से कुछ ही वेंटिलेटर अभी कार्य कर रहे हैं जबकि इन अस्पतालों में भर्ती मरीजों को बाइपैप मशीन के जरिए ही काम चलाना पड़ रहा है।
कभी भी देखने को मिल सकती है नई लहर
आईसीएमआर के ही वरिष्ठ संक्त्रसमक रोग विशेषज्ञ ने कहा कि देश में कभी भी नई लहर देखने को मिल सकती है। इसलिए अगर पिछले अनुभव से बचना है तो सरकारों के पास जमीनी स्तर पर काम करने के लिए अधिक समय नहीं है। वहीं प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के विजयराघवन भी तीसरी लहर को लेकर कह चुके हैं कि महामारी से बचने के लिए अगर सभी नियमों का पालन नहीं किया गया तो संक्त्रस्मण की गति और अधिक गंभीर हो सकती है।
तीसरी लहर से पहले इंतजाम
. अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट, लाने-जाने के लिए टैंकर, नए सिलेंडर का इंतजाम।
. आईसीयू, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और बाइपैप बिस्तरों पर अधिक ध्यान।
. कालाबाजारी से बचने के लिए दवा बाजार पर सरकार ?की निगरानी।
. सरकारी और प्राइवेट स्वास्थ्य क्षेत्र की तैयारी अलग अलग।
. खाली पदों पर अस्थायी नियुक्तियां तत्काल, आशा-एएनएम भी शामिल।
. जिला और तहसील स्तर पर डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी राज्य के शीर्ष चिकित्सीय संस्थानों पर।
. रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब जैसी दवाओं के वितरण पर जारी रहेगा सरकार का नियंत्रण।