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चिंताजनक : आरटी-पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव होने पर भी कोरोना संक्रमित मिल रहे मरीज

Fri, 09 Apr 2021 06:46 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

  • कई डॉक्टर एचआरसीटी की कर रहे सिफारिश, जांच में पुष्टि होने पर  दे रहे कोविड-19 का इलाज
  • कोरोना से ठीक होने वाले हर तीसरे इंसान को लंबे समय तक दिमागी और स्नायुतंत्र से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है
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कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करते स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI
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विस्तार
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क्या रैपिड एंटीजन टेस्ट और आरटी-पीसीआर टेस्ट में निगेटिव मिलने के बाद भी आप कोविड-19 पॉजिटिव हो सकते हैं? देश के विभिन्न शहरों में ऐसे मरीज आ भी रहे हैं, जिनमें यह रिपोर्ट निगेटिव हैं, लेकिन हालत गंभीर होने की वजह से उनका हाई रेजोल्यूशन सीटी (एचआरसीटी) किया जा रहा है। इसमें फेफड़ों में कोरोना के गंभीर संक्रमण की पुष्टि हो रही है।

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वडाेदरा नगर निगम ने इसे देखते हुए महामारी रोग अधिनियम के तहत आदेश दिया है कि आर-टीपीसीआर में निगेटिव मिले बीमार मरीजों को बीमा कंपनियां व थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) कोविड मरीज की तरह मानें।

नए स्ट्रेन के मरीजों में एचआरसीटी व लैब की बाकी जांच वायरस की पुष्टि कर सकते हैं। जब तक कोई और बीमारी न पता चले, कोविड के दावे को माना जाए। देश के कई शहरों में डॉक्टर इस प्रकार के मामले आने की पुष्टि कर रहे हैं और रेडियोलॉजिकल जांच में पुष्टि होने पर मरीजों को कोविड-19 का इलाज दे रहे हैं।
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मानसिक बीमारियों से जूझ रहा ठीक हुआ हर तीसरा इंसान
कोरोना से ठीक होने वाले हर तीसरे इंसान को लंबे समय तक दिमागी और स्नायुतंत्र से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें ज्यादातर लोग घबराहट और अवसाद के शिकार हो रहे हैं।

यह खुलासा एक शोध में हुआ है, जिसमें दो लाख से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य पर नजर रखी गई थी। लैंसेट साइकिएट्री में छपे अध्ययन के मुताबिक, संक्रमण के छह महीनों में 34 फीसदी लोगों ने मनोवैज्ञानिक या स्नायुतंत्र से जुड़ी बीमारियों का इलाज कराया है।

संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में आठ महीने बाद 10 में से किसी एक व्यक्ति में दोबारा कोरोना के गंभीर लक्षण मिल रहे हैं। यह खुलासा वैज्ञानिकों ने एक चिकित्सीय अध्ययन में किया है। इसका सीधा निगेटिव असर लोगों के सामाजिक और निजी जीवन पर पड़ रहा है।

मेडिकल जर्नल जामा में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों को पता चला है कि लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों में स्वाद और सुगंध की क्षमता खोने के अलावा थकान, बदनदर्द जैसी दिक्कतें भी होती हैं। स्वीडन के डैंडरिड अस्पताल और कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के दौरान कोरोना के लक्षणों को लेकर काफी कुछ पता किया है।

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प्रो. चार्लोट थालिन का कहना है कि युवा और स्वस्थ व्यक्तियों में कोरोना के बाद के लंबे समय तक होने वाले लक्षणों की जांच कर रहे हैं। इनमें सूंघने, स्वाद की क्षमता का खो देना अहम है। लोगों में थकान और सांस फूलने की समस्या वालों को अध्ययन में शामिल किया था।।
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वजह और जांच के नए कदम

  • डॉक्टरों को आशंका है कि वायरस अपनी पैथोजेनेसिटी (मेजबान को क्षतिग्रस्त करने की क्षमता) बदल रहा है। इससे कुछ मामलों में फेफड़े पहले चरण में ही संक्रमित हो रहे हैं। फेफड़े में संक्रमण पहुंचने का मतलब है रोग बढ़ चुका है। इसकी पहचान सीटी स्कैन में हो सकती है।
  • परिणाम में अब डॉक्टर केवल आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पर भरोसा नहीं कर रहे। उनके अनुसार यह निगेटिव मिल रही है, लेकिन मरीज के सीने के सीटी स्कैन में संक्रमण मिल रहा है।


आरटी-पीसीआर में 30 प्रतिशत फॉल्स निगेटिव की आशंका

  • विशेषज्ञों के अनुसार आरटी-पीसीआर में 30 प्रतिशत मामले फॉल्स निगेटिव, यानी संक्रमण होते हुए भी निगेटिव रिपोर्ट मिलने के हो सकते हैं। इसकी वजह इस टेस्ट का 70 प्रतिशत सफल होना बताया जा रहा है।
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