किसान महापंचायतों पर भी कोरोना और लॉकडाउन का ग्रहण लग गया है। किसान संगठनों ने देशभर में होने वाली महापंचायतों को बढ़ते संक्रमण के चलते स्थगित कर दिया है। अब संगठन नए सिरे से किसानों को आंदोलन से जोड़ने के लिए गांव-गांव जाएंगे और नए कृषि कानून की खामियां बताएंगे।
मध्यप्रदेश के किसान नेता राहुल राज ने अमर उजाला से कहा, मध्यप्रदेश में 11 और 12 अप्रैल को दो बड़ी किसान महापंचायतों का आयोजन होना था, लेकिन प्रशासन ने कोरोना के प्रकोप के चलते यहां लॉकडाउन लगा दिया है। इसके कारण दोनों महापंचायत को स्थगित करना पड़ा। इन रैलियों में किसान नेता राकेश टिकैत और शिवकुमार कक्काजी को शामिल होना था। लॉकडाउन के खुलने के बाद हम नए सिरे से गांव-गांव जाकर किसानों को जोड़ने का काम करेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में सरकारी आयोजन और चुनावी रैलियां लगातार हो रही हैं, लेकिन सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। जब जनता अपनी हक की आवाज उठाने के लिए कोई काम कर रही है तो उससे कोरोना फैलना बताया जा रहा है।
आंदोलन को खत्म करने की साजिश
किसान नेता हन्नान मौला ने बताया कि कोरोना के कारण वहां के स्थानीय प्रशासन ने हमें वहां बैठक करने की अनुमति नहीं दी इसलिए हमारी बैठकें स्थगित हो गई हैं। कोरोना और लॉकडाउन की आड़ में आंदोलन को रोकने और खत्म करने की पूरी साजिश की जा रही है। अब हमें आंदोलन को कैसे जिंदा रखना है, इसे लेकर जल्द ही बैठक करेंगे।
वार्ता के लिए दिखाई तैयारी
गौरतलब है कि रविवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने कहा है कि सरकार यदि संयुक्त किसान मोर्चा को वार्ता को न्यौता भेजेगी तो मोर्चा उस पर विचार करेगा। सरकार से वार्ता होगी तो वहीं से शुरू होगी, जहां 22 जनवरी को रूकी थी। तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी पर बात होगी, एमएसपी के लिए कानून पर बात होगी। हमारे मुद्दे वहीं रहेंगे।