दुग्ध उत्पादन से परिवार की जिंदगी बदल रही महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
दुग्ध उत्पादन से परिवार की जिंदगी बदल रही महिलाएं।
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कमाई में 18:82 का अनुपात
बनास डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्टर संग्राम आर. चौधरी ने अमर उजाला को बताया कि सहकारी संघों का मॉडल निजी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तरह कमाई करने पर केंद्रित नहीं है। यह कमाई का केवल 18 प्रतिशत हिस्सा कार्य संचालन के लिए अपने पास रखता है, जबकि दुग्ध उत्पादन से आने वाले पैसे का 82 फीसदी किसानों को देता है। केवल बोनस में हर साल किसानों को करोड़ों रुपयों की राशि बांटी जाती है। यही कारण है कि उनके जैसे सहकारी दुग्ध संघ गुजरात के किसानों की आर्थिक तरक्की का कारण बन गए हैं।
पशुपालन बड़ा आधार क्यों बना
बनास डेयरी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ब्रिगेडियर विनोद बाजिया (रिटायर्ड) ने बताया कि प्राकृतिक कारणों से बनासकांठा जैसे इलाकों में कृषि बहुत विकसित नहीं हुई। लिहाजा यहां के लोगों के लिए पशुपालन ज्यादा आकर्षक व्यवसाय बन गया। जब तक सहकारी संघों की दखल नहीं थी, किसानों की कमाई बिचौलिये ले जाते थे, लेकिन बनास डेयरी ने किसानों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराए हैं जिससे इनकी कमाई में शानदार बढ़ोतरी हुई है। यह कमाई अब पूरे इलाके में बदलाव के तौर पर दिखाई दे रही है।