राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो)
सेना के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की ओर से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखी चिट्ठी को लेकर खासा विवाद हो गया है। तीन पूर्व सेना प्रमुख समेत 156 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने चिट्ठी में लिखा है कि सेना और उनकी कार्रवाइयों का राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल हो रहा है। जबकि सेना को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
इस चिट्ठी की बात मीडिया में आने के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटा) एस एफ रॉड्रिग्स और पूर्व एयर चीफ मार्शल एन सी सूरी ने लिखित तौर पर कहा है कि उन्होंने ऐसे किसी कागजात पर हस्ताक्षर नहीं किया। दोनों अधिकारी चिट्ठी में लिखे मजमून से भी सहमत नहीं हैं। जबिक जनरल रॉड्रिग्स का नाम चिट्ठी में सबसे उपर है। दूसरी तरफ पूर्व मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ और पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटा) शंकर राय चौधरी ने खत लिखे जाने की बात स्वीकारी है।
राष्ट्रपति भवन भी ऐसी किसी चिट्ठी केमिलने से इनकार कर रहा है। जनरल रॉड्रिग्स ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम ऐसा क्यूं और कैसे हो रहा है। वह सारी जिंदगी राजनीति से दूर रहे। सेना किसी राजनीतिक दल की नहीं बल्कि देश की होती है। सरकार जो भी हो सेना को उसका पालन करना होता है। इस चिट्ठी में उनकी कोई सहमति नहीं ली गर्इ है। एयर चीफ मार्शल सूरी ने कहा कि यह चिट्ठी एडमीरिल राम दास की लिखी नहीं है। इसे किसी मेजर चौधरी ने लिखा है। इसे वाट्सऐप और इमेल किया जा रहा है। यह सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का ज्वलंत उदाहरण है।
लेकिन इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वाले ज्यादातर पूर्व अधिकारियों ने स्वीकारा है कि इस खत पर उनकी सहमति ली गर्इ थी। चिट्ठी में मोदी की सेना वाले बयान और चुनावी पोस्टरों पर सेना के शौर्य और विंग कमांडर अभिनंदन की तस्वीर के इस्तेमाल पर आपत्ति जतार्इ गर्इ है।