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EC: केरल में चुनाव आयोग के सर्कुलर पर भाजपा की सील होने का विवाद बढ़ा, पुलिस ने सोशल पोस्ट पर शुरू की कार्रवाई

Wed, 25 Mar 2026 11:39 AM IST
Asmita Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

केरल में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसी बीच चुनाव आयोग के सर्कुलर पर भाजपा का मुहर लगने के कारण विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने सोशल मीडिया के पोस्ट पर कार्रवाई शुरू कर दी है। 
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भारतीय चुनाव आयोग - फोटो : IANS
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विस्तार
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केरल में चुनाव आयोग के आधिकारिक सर्कुलर पर भाजपा की मुहर दिखने को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले दो दिनों में पुलिस की कार्रवाई ने इस मुद्दे में तनाव की एक नई परत जोड़ दी है। केरल पुलिस ने एक व्यापक कदम उठाते हुए 270 एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल, 200 फेसबुक पेज और 90 इंस्टाग्राम अकाउंट को नोटिस जारी किया है। जिन्होंने विवादास्पद सर्कुलर की तस्वीर साझा की थी।

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पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
पुलिस के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, फेसबुक और इंस्टाग्राम ने उस तस्वीर वाली पोस्ट को हटा दिया है। वहीं एक्स पर कई पोस्ट अभी भी उपलब्ध हैं, जिससे प्लेटफार्मों पर असमान प्रवर्तन को लेकर सवाल उठते हैं। इस घटनाक्रम ने राज्य के भीतर तेजी से प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। आलोचकों का आरोप है कि मूल मुद्दे को संबोधित करने के बजाय ऑनलाइन चर्चा को दबाने के लिए कानून प्रवर्तन का उपयोग किया जा रहा है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। खासकर इसलिए क्योंकि ये नोटिस उन उपयोगकर्ताओं को लक्षित करते हैं, जिन्होंने सार्वजनिक हित के मामले से जुड़ी सामग्री प्रसारित की थी।

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विवाद कब शुरू हुआ? 
यह विवाद चुनाव आयोग से संबंधित एक आधिकारिक सूचना के प्रसार से शुरू हुआ, जिसमें भाजपा की मुहर लगी हुई देखी गई, जिससे संवैधानिक निकाय की निष्पक्षता पर तुरंत बहस छिड़ गई। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जिसके बाद स्पष्टीकरण की मांग उठने लगी। चुनाव आयोग ने बाद में संकेत दिया कि मुहर की उपस्थिति एक गलती थी, लेकिन इस स्पष्टीकरण से बढ़ती बेचैनी को शांत करने में कोई खास मदद नहीं मिली। पिछले 48 घंटों में ध्यान सर्कुलर से हटकर पुलिस की प्रतिक्रिया पर केंद्रित हो गया है।

कानूनी विशेषज्ञ और पर्यवेक्षक बताते हैं कि गलत सूचना और छेड़छाड़ की गई सामग्री से निपटना आवश्यक है, लेकिन कोई भी कार्रवाई आनुपातिक और पारदर्शी होनी चाहिए। खासकर जब इसमें संवैधानिक संस्था शामिल हो। यह घटना राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में घटी है। क्योंकि केरल में चुनाव का मौसम शुरू होने वाला है, जहां संस्थागत विश्वसनीयता की कड़ी जांच की जा रही है अधिकारियों की ओर से विस्तृत और सार्वजनिक स्पष्टीकरण न मिलने से अनिश्चितता और बढ़ गई है, जिससे अटकलें जारी हैं। केरल में 9 अप्रैल को 140 नए विधायकों के चुनाव के लिए मतदान होगा। 

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