महाराष्ट्र के ठाणे में सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना के 32 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के बाद विपक्षी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने निकाय चुनावों में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। विपक्ष ने इसके लिए सरकारी तंत्र और पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही उन्होंने 'नोटा' (इनमें से कोई नहीं) विकल्प की मांग करते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की।
राज्यभर में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों में निर्विरोध चुने गए 68 उम्मीदवारों में से 32 प्रत्याशी अकेले ठाणे जिले से हैं। इसमें भाजपा 20 निर्विरोध प्रत्याशियों के साथ सबसे आगे है, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 12 उम्मीदवार शामिल हैं। कल्याण में 14 भाजपा और छह शिवसेना प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए हैं। जबकि ठाणे और भिवंडी में दोनों सत्तारूढ़ दलों के छह-छह उम्मीदवारों ने यह तमगा हासिल किया है।
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विपक्ष ने सरकार को घेरा
रविवार को एक साझा प्रेस वार्ता में शिवसेना (यूबीटी) नेता राजन विचारे और मनसे के ठाणे-पालघर प्रमुख अविनाश जाधव ने राज्य सरकार और पुलिस पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सहयोगियों के लिए निर्विरोध चुनावी जीत की व्यवस्था करने का आरोप लगाया। जाधव ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी नामांकन वापसी के दिन शिवसेना (यूबीटी) प्रत्याशी विक्रांत घाग को ठाणे शहर में शिंदे के बंगले तक ले जाते हुए दिख रहा है और वह प्रत्याशी तबसे लापता है। उन्होंने दावा किया कि यह चुनाव धनबल और पुलिस के दबाव में हो रहा है।
पूर्व सांसद विचारे लगाए गंभीर आरोप
पूर्व सांसद विचारे ने आरोप लगाया कि राज्यभर में डरा-धमकाकर और नामांकन रद्द करवाकर कई उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत दिलाई गई है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव अधिकारियों ने पूरे महाराष्ट्र में 336 नामांकन फॉर्म को खारिज किया, जिससे सत्तारूढ़ दल को लाभ मिला। उन्होंने संबंधित चुनाव अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मनसे नेता जाधव ने चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे के भीतर इन अधिकारियों को नहीं बदला गया, तो उनकी पार्टी अपने तरीके से विरोध करेगी।
विपक्ष ने की नाटो विकल्प की मांग
इससे पहले, शिवसेना (यूबीटी) की ठाणे इकाई के प्रमुख केदार दिघे ने नतीजों की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भले एक ही प्रत्याशी हो, तो भी मतदाताओं को नोटा का विकल्प दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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न्यायालय में दे सकते हैं चुनौती
राज ठाकरे की पार्टी ने संकेत दिया कि वह उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत को अदालत में चुनौती दे सकती है। इस बीच, ठाणे नगर निगम ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय के लिए नाम राज्य चुनाव आयोग को भेज दिए गए हैं। वहीं, नवी मुंबई नगर निगम चुनावों में किसी भी प्रत्याशी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित नहीं किया गया है।
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