कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में अनुबंध पर काम कर रहे एक चालक ने गुरुवार सुबह कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस के मुताबिक, यह घटना उपायुक्त (डीसी) कार्यालय परिसर में हुई, जहां चालक ने एक पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी।
मृतक की पहचान एम. बाबू (35 वर्षीय) के रूप में हुई है, जो जिला पंचायत में पिछले छह से सात वर्षों से अनुबंध पर चालक के रूप में काम कर रहा था। इस समय वह मुख्य लेखा अधिकारी के लिए चालक के रूप में तैनात था। पुलिस के मुताबिक, बाबू ने कथित आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उन्होंने बीजेपी सांसद के. सुधाकर और दो अन्य व्यक्तियों का नाम लिया है। बाबू ने आरोप लगाया है कि ये लोग उसकी मौत के जिम्मेदार हैं।
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चिक्कबल्लापुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुणाल चौकसे ने बताया, गुरुवार सुबह हमें करीब साढ़े आठ बजे सूचना मिली कि किसी ने डीसी कार्यालय के पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। एसपी ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि बाबू ने अपनी पत्नी से कहा था कि उसे एक अधिकारी को मीटिंग में ले जाना है और वह सरकारी वाहन लेकर घर से निकला था। लेकिन वह डीसी कार्यालय चला गया और वहीं उसने आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद किया है जिसमें कई नाम लिखे गए हैं। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुसाइड नोट में भाजपा सांसद सुधाकर, जिला पंचायत के एक लेखा सहायक और एक व्यक्ति नागेश का नाम लिखा गया है। बाबू ने आरोप लगाया है कि नागेश और लेखा सहायक ने उससे कई लाख रुपये ठग लिए। उन्होंने कहा था कि वे सांसद की सिफारिश से उसे सरकारी नौकरी दिलवा सकते हैं।
पुलिस ने कहा, ये बहुत गंभीर आरोप हैं। जांच के बाद ही पता चलेगा कि सांसद प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे या उनका नाम केवल इस्तेमाल किया गया। बाबू की पत्नी की शिकायत पर मामला दर्ज किया जाएगा। घटना की जांच जारी है। घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद के. सुधाकर ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें इस घटना से गहरा दुख है, लेकिन उन्होंने इस व्यक्ति को जानने से इनकार किया।
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सांसद ने कहा, मैंने डीसी कार्यालय में आत्महत्या की खबर सुनी है। यह बेहद दुखद है। मैं परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। मैंने बाबू नामक व्यक्ति को कभी नहीं देखा या जाना। पूर्व मंत्री और तीन बार विधायक रह चुके सुधाकर ने कहा कि उन्होंने कई युवाओं को नौकरी दिलाने में मदद की है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बाबू ने उनके नाम का जिक्र क्यों किया। उन्होंने कहा, मुझे उन दो अन्य व्यक्तियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैंने सुना है कि नागेश और मंजीनाथ ने बाबू को नौकरी का झांसा देकर उससे 10-15 लाख रुपये लिए थे। मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता।
सुधाकर ने यह भी बताया कि नागेश के ससुर पहले जेडीएस पार्टी के तालुक पंचायत अध्यक्ष थे और बाद में उनके साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्होंने बताया, हमने नागेश को चिक्कबल्लापुर विकास प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बनाया था।