कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पुराने और वरिष्ठ नेताओं को रिटायर करना या ठेस पहुंचाना नहीं चाहते। बल्कि पार्टी में उनकी ससम्मान भूमिका तय कर उनके अनुभव का लाभ लेने की कोशिश करना चाहते हैं। भाजपा के मार्गदर्शक मंडल की तर्ज पर कांग्रेस में एक सलाहकार मंडल बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसकी बागडोर सोनिया गांधी को सौंपी जा सकती है। यह विभिन्न मुद्दों और राजनीतिक पेचीदगी पर बैठक कर अपनी राय और सुझाव पार्टी अध्यक्ष को दे सकेगा। हालांकि अंतिम फैसले का अधिकार पार्टी अध्यक्ष के पास ही रहेगा।
दरअसल, राहुल पार्टी में अब ऐसे लोगों को महत्व देकर आगे लाना चाहते हैं, जो लंबे अनुभव और सक्रियता के बाद भी कांग्रेस सरकारों व संगठन से दूर रहे हैं। वहीं वरिष्ठ और लगातार पार्टी का चेहरा रहे तमाम नेता जिन्हें लगातार विभिन्न पदों पर मौका मिलता रहा हैस उन्हें सलाहकार या अन्य भूमिका में शामिल किया जाएगा। हाल ही भंग की गई कार्यसमिति में तमाम चेहरे ऐसे हैं, जो सोनिया के 19 साल लंबे कार्यकाल और उससे पहले से जगह पाते रहे हैं। उनमें से भी कुछ बतौर सलाहकार सामने आएंगे।
कांग्रेस के भीतर लगातार इस बात का दबाव बनाया जा रहा है कि कार्यसमिति का चयन मनोनयन से ही हो। उसके पीछे तर्क है कि चुनाव की हालत में गुटबाजी हावी होगी और कुछ बड़े नेताओं को फजीहत का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष के फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होगी। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है कि कार्यसमिति के सदस्यों का चयन चुनाव से होगा या नहीं।
कार्यसमिति में दिया जाना है विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्रीय कार्य समिति के गठन का जो फार्मूला सार्वजनिक किया है, उसमें विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जाना है। ऐसे में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और हाल ही बनाए गए नए संगठनों को भी प्रतिनिधित्व मिल सकता हैं। पार्टी महिलाओं की भागीदारी को लेकर अधिक संवेदनशील दिख रही है। कार्यसमिति में उनकी हिस्सेदारी भी स्पष्टता से दिखेगी।