फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: 'रैगिंग और जातिगत भेदभाव के मामलों से निपटने पर किया जाए विचार', सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी को निर्देश

Mon, 15 Sep 2025 10:05 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने यूजीसी को मसौदा विनियम 2025 को अधिसूचित करने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूजीसी उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या को रोकने के लिए रैगिंग, यौन उत्पीड़न और जाति, लिंग, विकलांगता तथा अन्य पूर्वाग्रहों के आधार पर भेदभाव से निपटने के सुझावों पर विचार करे। 
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या को रोकने के लिए रैगिंग, यौन उत्पीड़न और जाति, लिंग, विकलांगता तथा अन्य पूर्वाग्रहों के आधार पर भेदभाव से निपटने के सुझावों पर विचार करने के लिए कहा है। यूजीसी इस पर मसौदा नियम तैयार कर रहा है।
विज्ञापन


जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यूजीसी से दो महीने के भीतर सुझावों पर विचार करने को कहा है। पीठ ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं के विचारों पर भी विचार करने को कहा है, जिन्होंने अपने-अपने परिसरों में जाति आधारित भेदभाव का सामना करने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मसौदा नियम प्रकाशित किए गए थे और एक विशेषज्ञ समिति ने प्राप्त 300 से अधिक आपत्तियों की जांच की थी। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ समिति ने आपत्तियों की जांच के बाद यूजीसी से मसौदा नियमों में कुछ संशोधन करने को कहा है। यूजीसी वर्तमान में विशेषज्ञ समिति की उन सिफारिशों की जांच कर रहा है। रोहित वेमुला और पायल तड़वी की मां की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वे चाहती हैं कि यूजीसी उनके सुझावों पर विचार करे। ताकि और अधिक जानें न जाएं। 
विज्ञापन


पीठ की ओर से दर्ज किए गए सुझावों में भेदभाव पर रोक, उच्च शिक्षण संस्थानों को प्रवेश रैंक या शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर छात्रावास, कक्षाएं, या व्यावहारिक/प्रयोगशाला बैच आवंटित करने से रोकना, परिसर के भीतर मेरिट सूची या रैंक आधारित अलगाव के सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक और शैक्षणिक सहायता के लिए रैंक आधारित सिस्टम की अनुमति न देना शामिल है।  यह अक्सर हाशिये की पृष्ठभूमि के छात्रों को बाहर कर देता है।

सुझावों में छात्रवृत्ति वितरण पर भी जोर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि छात्रवृत्ति का उपयोग उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा छात्रों को परेशान करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। आंतरिक शिकायत निवारण, शिकायतों का संरक्षण, लापरवाही के लिए व्यक्तिगत दायित्व, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, जाति भेदभाव पर दिशानिर्देश, समान शिक्षण सहायता, आंतरिक मूल्यांकन के अलावा अन्य सुझाव भी शामिल हैं।

24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने यूजीसी को मसौदा विनियम 2025 को अधिसूचित करने की अनुमति दी थी। जो उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग, यौन उत्पीड़न और जाति, लिंग, विकलांगता के आधार पर भेदभाव तथा अन्य पूर्वाग्रहों से निपटते हैं। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पीएचडी स्कॉलर वेमुला की 17 जनवरी, 2016 को मृत्यु हो गई थी, जबकि टीएन टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज की छात्रा तड़वी की 22 मई, 2019 को मृत्यु हो गई थी, जब उसके कॉलेज में तीन डॉक्टरों द्वारा कथित भेदभाव किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें