सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि ट्रायल से पहले के चरण में आपराधिक प्रक्रिया को खत्म करने के परिणाम गंभीर और अपूरणीय हो सकते हैं। जस्टिस के एम जोसेफ और हृषिकेश रॉय की पीठ ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत चेक बाउंस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया।
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अदालत ने कहा, आपराधिक प्रक्रिया को पूर्व परीक्षण चरण में समाप्त करने के परिणाम गंभीर और अपूरणीय हो सकते हैं। प्रारंभिक चरणों में कार्यवाही को रद्द करने के परिणामस्वरूप पक्षकारों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिए बिना अंतिम रूप दिया जाएगा।
पीठ ने कहा कि अगर इसकी अनुमति दी जाती है तो आरोपी को आपराधिक प्रक्रिया में अयोग्यता लाभ दिया जा सकता है। इसके अलावा कानूनी अनुमान के कारण जब अपीलकर्ता द्वारा चेक और हस्ताक्षर विवादित नहीं होते हैं, तो इस स्तर पर सुविधा का संतुलन शिकायतकर्ता/अभियोजन के पक्ष में है, क्योंकि अभियुक्त के पास मुकदमे के दौरान बचाव साक्ष्य पेश करने का उचित अवसर होगा।
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पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में जहां आरोपी मुकदमा शुरू होने से पहले ही रद्द करने के लिए अदालत का रुख करता है, अदालत का रुख इतना सावधान होना चाहिए कि शिकायत का समर्थन करने वाली कानूनी धारणा की अवहेलना करके मामले को समय से पहले खत्म न किया जाए। किसी भी तरह जब भी तथ्यों पर विवाद होता है, तो सबूतों को तौलकर सच्चाई को सामने आने दिया जाना चाहिए।