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पिता की विरासत पर चल सीएम की कुर्सी तक पहुंचे संगमा

Tue, 06 Mar 2018 01:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) अध्यक्ष कोनराड संगमा अपने पिता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पूर्णो ए. संगमा की विरासत पर चलते हुए महज 40 साल की उम्र में ही मेघालय के मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत पिता के चुनाव अभियान की कमान संभालने से की थी। संगमा के नाम पर राज्य का सबसे युवा वित्त मंत्री बनने का रिकॉर्ड भी है।

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पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी. ए. संगमा की पुत्री अगाथा को ही उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन कोनराड ने अपनी बहन को पीछे छोड़ते हुए यह विरासत संभाली। संगमा को मिली 19 सीटों और भाजपा के सियासी गणित ने उन्हें सीएम की कुर्सी तक पहुंचा दिया।

इस बार नहीं लड़ा विधानसभा चुनाव

सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि संगमा ने इस बार विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ा था। कोनराड मेघालय क्रिकेट असोसिएशन और पी. ए. संगमा फाउंडेशन के अध्यक्ष भी हैं। उनकी फाउंडेशन राज्य के ग्रामीण इलाकों में चार कॉलेजों का संचालन करता है। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में पहली बार जीत कर संगमा विधानसभा पहुंचे थे। 

उन्होंने कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार में वित्त एवं बिजली जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके नाम मंत्री के तौर पर शपथ लेने के दस दिन के भीतर राज्य का बजट पेश करने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। वर्ष 2009 से 2013 तक वह विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं।
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संगमा ने नई दिल्ली के सैंट कोलंबस स्कूल से शुरूआती पढ़ाई करने के बाद लंदन और अमेरिका के पेनसिल्वेनिया विश्वविघालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद पिता पी. ए. संगमा के चुनाव अभियान प्रबंधक के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की। संगमा के पिता तब नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनपीपी) में थे।

चुनावों में एनपीपी के बेहतर प्रदर्शन के बाद पी. ए. संगमा की पुत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अगाथा संगमा का नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे था। लेकिन भाजपा के सियासी गणित से ऐसा संभव नहीं हो पाया। अगाथा के नाम पर सहयोगी दलों के राजी ना होने से संगमा को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल गई। पिता पी. ए. संगमा की मौत के बाद वर्ष 2016 में कोनराड ने तूरा संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल की और संसद तक पहुंचे थे। 
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