लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब के बिना गुरुवार को धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। ऐसे में अब यह मामला देश की संसदीय परंपराओं में एक असाधारण और विवादित घटना बन गया है। इस बात को लेकर देशभर में चर्चा और विरोध दोनों खूब हो रहे हैं। इसी बीच अब कांग्रेस ने इसको लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। साथ ही इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से जवाब मांगा है।
कांग्रेस सांसद और पार्टी के महासचिव केसी. वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बहस खत्म करने और धन्यवाद प्रस्ताव पास करने में संसदीय नियमों का पालन नहीं किया गया। वेणुगोपाल ने अपने पत्र में बताया कि लोकसभा के नियम 20 के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस के अंत में प्रधानमंत्री का जवाब देना अनिवार्य होता है।
पीएम मोदी के जवाब पर क्या बोले वेणुगोपाल
वेणुगोपाल ने कहा कि अगर किसी कारण से प्रधानमंत्री जवाब नहीं दे सकते, तो उन्हें खुद सदन को इसकी जानकारी देनी चाहिए। लेकिन इस मामले में न तो प्रधानमंत्री ने जवाब दिया और न ही सदन को बताया गया कि वे जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं। यह सीधे तौर पर नियम 20 का उल्लंघन है।
ये भी पढ़ें:- राज्यसभा में बोले PM: रोज दो किलो गाली खाता हूं, मोहब्बत की दुकान वाले 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' के नारे लगा रहे
बहस कैसे खत्म की जाती है?
वेणुगोपाल ने आगे कहा कि आमतौर पर किसी भी बहस को संबंधित मंत्री के जवाब के बाद ही समाप्त किया जाता है। अगर किसी विशेष परिस्थिति में बिना जवाब के बहस खत्म करनी हो, तो इसके लिए नियम 362 के तहत एक प्रस्ताव लाया जाता है, जिसे सदन की मंजूरी मिलनी जरूरी होती है। लेकिन न तो ऐसा कोई प्रस्ताव लाया गया और न ही सदन से इसकी अनुमति ली गई। इसके बावजूद दोपहर करीब 12 बजे धन्यवाद प्रस्ताव को अचानक वोट के लिए रख दिया गया।
क्या है कांग्रेस की मांग?
केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि वे सदन को साफ-साफ बताएं कि प्रधानमंत्री का जवाब कैसे छोड़ा गया और बहस को बंद करने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने कहा कि लोकसभा के नियम संविधान के अनुच्छेद 118 के तहत बने हैं, और सांसदों को अनुच्छेद 105 के तहत बोलने की पूरी आजादी है। उन्होंने कहा कि इस आजादी की रक्षा करना स्पीकर की जिम्मेदारी है।
पीएम सदन में मौजूद नहीं थे
बता दें कि जब विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधनों पर वोटिंग हुई, उस समय प्रधानमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। सभी संशोधन खारिज कर दिए गए और फिर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनि मत (वॉयस वोट) से पास कर दिया गया। इस दौरान विपक्षी सांसद जोरदार नारेबाजी कर रहे थे। हालात बिगड़ते देख लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।
इसके बाद कांग्रेस सांसद वेल में पहुंच गए और उन्होंने प्रधानमंत्री की तस्वीर वाले पोस्टर लहराए, जिन पर 'नरेंद्र-आत्मसमर्पण' लिखा हुआ था। वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पूरा देश हैरान और परेशान है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना क्यों टाल दिया।
ये भी पढ़ें:- मोदी के शब्द बाण: शातिर युवराज से सरनेम चुराने वाले तक, विपक्ष पर किया PM का हर प्रहार, इन्फोग्राफिक्स में
संवैधानिक विशेषज्ञ की राय
गौरतलब है कि इस पूरे मामले में संवैधानिक विशेषज्ञ और पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी. आचार्य ने इसे एक अभूतपूर्व घटना बताया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसा कभी नहीं हुआ कि धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना पास कर दिया जाए। हालांकि उन्होंने 2004 का एक उदाहरण दिया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आपसी सहमति से बिना लंबा भाषण दिए प्रस्ताव को सीधे वोटिंग के लिए रखने का अनुरोध किया था। उस समय विपक्ष भी इस पर सहमत था।