उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव परिणाम भले ही कुछ भी रहे लेकिन कांग्रेस मिशन यूपी फतह की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी थिंकटैंक ने 300 सीटों के लिए नाम फाइनल करने की कसरत शुरू कर दी, इसके लिए जनाधार वाले और मजबूत प्रत्याशी चयन के लिए संगठन के अलावा पांच अन्य माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है।
पार्टी सपा और बसपा की तरह विधानसभा क्षेत्र प्रत्याशियों के नाम जल्द फाइनल कर उनको जनता के बीच भरपूर वक्त बिताने का मौका देना चाहती है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस यूपी के 2017 के विधानसभा चुनाव को 2019 के लोकसभा चुनाव की सेमीफाइनल की तरह लड़ना चाहती है। पार्टी का मानना है कि विधानसभा चुनाव में सियासी जमीन जितनी मजबूत हो जाएगी, आगे उसका उतना फायदा तय है।
2019 में भाजपा से देश की सत्ता छीनने का लक्ष्य सामने रखे कांग्रेस विधानसभा क्षेत्र के लिए प्रत्याशियों के चयन में पार्टी संगठन के अलावा पांच अन्य माध्यम से सहयोग ले रही है।
किस सीट पर कौन जीत दर्ज कर सकता है इसके लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी, जिला कमेटी और ब्लाक कमेटी, फ्रंटल संगठन, निजी कंपनी के सर्वे और प्रशांत किशोर की टीम की रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है।
सभी की अलग अलग रिपोर्ट के मिलान के बाद जो नाम समान होगा, उसको हरी झंडी हाईकमान देगा। जिला संगठन से मांगे गए प्रत्याशियों के पैनल ज्यादातर जिलों से प्रदेश हाईकमान को भेज दिए गए हैं। चंद जिलों से पैनल जाने शेष हैं।
बताया जा रहा है कि 8 जुलाई यानी ईद के बाद पांचों स्तर से मिली रिपोर्टों की स्क्रीनिंग शुरू हो जाएगी। शेष 103 सीटों के लिए नाम कुछ दिन बाद तय होंगे। इसमें देरी की वजह अन्य दल से गठबंधन की संभावनाओं को भी टटोलना भी माना जा रहा है।
ईद मिलन होगा मुलाकात का बहाना
पार्टी का खोया जनाधार हासिल करने व मुस्लिमों पर पकड़ बनाने के लिए राज्य प्रभारी गुलाम नबी आजाद रोजा इफ्तार के साथ ईद मिलन के जरिये भी कोशिश करेंगे। तीन दिन पहले स्याना (बुलंदशहर) में रोजा इफ्तार कार्यक्रम करने के बाद रविवार को लखनऊ में बड़ा रोजा इफ्तार किया। उसके बाद पार्टी की योजना 9 जुलाई से ईद मिलन कार्यक्रम आयोजित करने की है।
आजाद ने 9 जुलाई को मेरठ में और उसके बाद मुजफ्फरनगर व सहारनपुर में ईद मिलन कार्यक्रम करना लगभग तय कर लिया है। उसके बाद अन्य प्रमुख जिलों में गुलाम नबी के ईद मिलन कार्यक्रम होंगे।