403 में से 200 टिकट सवर्णों को देने की तैयारी, ब्राह्मणों को वरीयता
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कांग्रेस यूपी में सवर्णों पर बड़ा दांव लगा सकती है। 2017 के विधानसभा चुनाव में करीब आधे टिकट सवर्ण उम्मीदवारों को देने पर गंभीर मंथन चल रहा है। साथ ही किसी दलित सियासी चेहरे को भी सामने लाने की कोशिश पार्टी की है।
समाज को जोड़कर आगे बढ़ने के नारे के मुताबिक पार्टी के पास दलित सियासी चेहरे का अभाव है। कांग्रेस की कोशिश अब दलित चेहरे की तलाश करने की है। हालांकि नौकरशाह रहे पीएल पूनिया पार्टी के पास एक बड़ा नाम हैं, लेकिन थिंकटैंक का मानना है कि पार्टी से लंबे वक्त से जुड़े रहने के बाद भी पूनिया दलितों में सियासी स्तर पर बड़ी पहचान बनाने में कामयाब नहीं हो सके। हापुड़ के एमएलए गजराज सिंह कई बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। अभी भी विधायक हैं। उनको आगे बढ़ाने पर पार्टी विचार कर सकती है। पहले उनको विधानमंडल दल का नेता बनाने पर एक राय बन गई थी, लेकिन विधानसभा का सिर्फ एक सत्र बाकी रहने के कारण घोषणा नहीं हो सकी थी। पार्टी के पास दलित चेहरा नहीं होने की बात पर यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद का कहना है कि जल्द इसकी कमी पूरी करने की कोशिश करेंगे। अन्य जातियों को भी जोडे़ंगे।
पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि 403 में से करीब आधे यानि 200 टिकट सवर्णों को दिए जाने पर सहमति बन रही है। इनमें सर्वाधिक ब्राह्मण को, दूसरे नंबर पर ठाकुर (राजपूत) को और बाकी सवर्ण में अन्य जातियों को दिए जाने का प्रस्ताव है। बताया जा रहा हैै कि यह सुझाव पार्टी के रणनीतिकार कहे जाने वाले प्रशांत किशोर का है। जिस पर पार्टी लगभग एकमत दिख रही है। मंगलवार और बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय पर यूपी को-ऑर्डिनेशन और कैंपेन कमेटी सदस्यों की मीटिंग में इस पर विचार किया गया, ऐसी चर्चा पार्टी मुख्यालय में है। पार्टी के प्रवक्ता आरपीएन सिंह का इस बाबत कहना है कि टिकट किसको मिलेगा यह सही वक्त पर तय होगा। सबको साथ लेकर चलने वाली नीति कांग्रेस की हमेशा से रही है और रहेगी।