राष्ट्रपति चुनाव में टीआरएस, अन्नाद्रमुक और वाईआरएस कांग्रेस जैसी पार्टियों का रुख और मतों का अंकगणित विपक्षी दलों की परेशानी बढ़ा रहा है, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के अस्पताल में भर्ती होने के कारण विपक्षी नेताओं से मिलने का सिलसिला थमा जरूर है, लेकिन कांग्रेस राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज करना चाहती है। कांग्रेस को लगता है कि 1982 में ज्ञानी जैल सिंह और 2007 में प्रतिभा पाटिल के चुनाव में कांग्रेस को एनडीए के सहयोगियों का साथ भी मिला था। इसी को ध्यान में रखकर वह विपक्षी दलों की गिनती पूरी कर लेना चाहती है।
कांग्रेस ने 2007 में जब प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था तब उसके पास जीत हासिल करने के लिए पर्याप्त मत नहीं थे। प्रतिभा पाटिल चूंकि महाराष्ट्र से ताल्लुक रखती थीं, लिहाजा शिवसेना ने भाजपा उम्मीदवार भैरोसिंह शेखावत के खिलाफ जाने का फैसला लिया।
कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने के लिए सिर्फ शिवसेना ही नहीं, बल्कि राजग के सहयोगी रहे जनता दल यूनाइटेड ने भी प्रतिभा पाटिल को बेहतर उम्मीदवार माना। लिहाजा भाजपा उम्मीदवार भैरोसिंह शेखावत करीब तीन लाख वोट से हार गए।
कांग्रेस ने 1982 में ज्ञानी जैल सिंह को उम्मीदवार बनाया था। उस समय कांग्रेस मतों की दृष्टि से अपने उम्मीदवार को आसानी से जिता सकती थी। तब सिख उम्मीदवार होने के नाते अकालियों और कुछ अन्य दलों ने कांग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन किया था।