महाराष्ट्र में सरकार बनाने की उलझन ने सत्तारुढ़ भाजपा ही नहीं कांग्रेस को भी परेशान कर रखा है। इसी बीच, महाराष्ट्र की गुत्थी सुलझाने में जुटी कांग्रेस ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली अपनी मेगा रैली टाल दी है। रैली को सोनिया गांधी और राहुल गांधी संबोधित करने वाले थे। 30 नवंबर को आयोजित होने वाली इस रैली से कांग्रेस दिल्ली विधानसभा चुनाव का आगाज करने वाली थी। इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारियां भी चल रही थीं, लेकिन मंगलवार सुबह अचानक लिए गए एक फैसले में इस रैली को अगले कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया।
कांग्रेस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र की राजनीतिक गतिविधियों से पार्टी को उम्मीद थी कि संसद सत्र शुरू होने के आसपास सरकार बनाने की गुत्थी सुलझ जाएगी। इसके बाद रामलीला मैदान में रैली करके केंद्र सरकार पर जमकर हल्ला बोला जाएगा जिसका व्यापक असर होगा। देश में छाई बेरोजगारी को रैली में सबसे बड़ा मुद्दा बनाया जाना था। लेकिन महाराष्ट्र की गुत्थी सुलझने के बजाय और अधिक उलझती दिख रही है। इसे हल होने में अभी कुछ समय और लग सकता है। इसे देखते हुए प्रस्तावित रैली को अगले कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया है।
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा और उनकी टीम पूरी मेहनत के साथ राजधानी में पार्टी को मजबूत करने में जुटी हुई है। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए समय काफी कम रह गया है। यही कारण है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी की महारैली आयोजित करवाकर प्रदेश नेतृत्व अपनी चुनावी मुहिम में धार लाना चाहता था। फिलहाल, अगले कुछ दिनों के लिए उसकी इस योजना पर विराम लग गया है।
बेरोजगारी को बनाएगी बड़ा मुद्दा
पूरे देश में आर्थिक मंदी चल रही है। बैंकिंग, बीमा, कृषि, निर्माण, आटो, मीडिया, घरेलू उपभोक्ता वस्तुओं के जैसे अनेक क्षेत्र मंदी की मार से गुजर रहे हैं। इसके कारण बेरोजगारी भी चरम पर है और अनेक कंपनियों में छंटनी हुई है। दिल्ली जैसे प्रदेश के चुनाव में जहां सर्विस सेक्टर के लोगों की बहुलता है, नौकरी लोगों की प्राथमिकता है। लेकिन कंपनियों में हो रही छंटनी लोगों के लिए बड़ी चिंता का सबब बनी हुई है। यही कारण है कि कांग्रेस इसे अपना प्रमुख राजनीतिक हथियार बनाना चाहती है। रामलीला मैदान की रैली भी इसी रणनीति का हिस्सा बताई जा रही थी।