कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने तमिलनाडु की नई राजनीतिक स्थिति और टीवीके सरकार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई दल स्वेच्छा से समर्थन देना चाहता है तो उसे मना नहीं किया जाएगा, लेकिन विजय के नेतृत्व वाली सरकार को एआईएडीएमके के किसी भी अलग गुट को शामिल करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कहा कि सीएम विजय पहले से मिले समर्थन के आधार पर खुद एक स्थिर सरकार चला सकते हैं।
डीएमके के साथ पुराने गठबंधन और चुनाव बाद टीवीके को समर्थन देने पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि इसे विश्वासघात नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद डीएमके सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थी।
उन्होंने कहा कि मैं आज भी डीएमके का सम्मान करता हूं। यह तमिलनाडु की राजनीति में भविष्य रखने वाली बड़ी राजनीतिक ताकत है। हमने वर्षों तक उनके साथ मिलकर काम किया और कई चुनाव जीते। लेकिन इस चुनाव में जनता ने साफ तौर पर विजय के नेतृत्व वाली सरकार के पक्ष में जनादेश दिया।
राष्ट्रीय राजनीति पर बोलते हुए कार्ति चिदंबरम ने भरोसा जताया कि राज्य स्तर पर मतभेद होने के बावजूद संसद में कांग्रेस और डीएमके INDIA गठबंधन के तहत साथ काम करते रहेंगे। उन्होंने केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी अलग राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करते हैं।
NEET परीक्षा को लेकर भी कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस परीक्षा का लगातार विरोध करती रही है और पार्टी संसद में भी यह मुद्दा उठाएगी।
कार्ति चिदंबरम ने करीब 22 लाख छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने के प्रस्ताव को अव्यावहारिक और छात्रों व अभिभावकों पर मानसिक दबाव बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि राज्यों को यह अधिकार होना चाहिए कि वे प्रवेश परीक्षा या प्लस-टू अंकों के आधार पर अपनी प्रवेश प्रक्रिया तय करें।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा संचालित कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया में केंद्र सरकार को दखल नहीं देना चाहिए। साथ ही उन्होंने अन्य राज्यों से भी तमिलनाडु के साथ मिलकर NEET का विरोध करने की अपील की।