उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी केसाथ गठबंधन केनए प्रयोग का सारा दारोमदार अपने कंधों पर उठाए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बेहद आश्वस्त हैं कि विधानसभा चुनावों में सपा कांग्रेस गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलेगा और राज्य में नई सरकार बनाने में कांग्रेस की खासी महत्वपूर्ण भूमिका होगी और फिर पार्टी राज्य में अपनी जमीन फिर पा लेगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए राहुल कहते हैं कि संघ हिंदू संगठन नहीं है बल्कि हिंदू धर्म के मूल सिद्धांत जिनमें प्यार से रहना और हर सोच का सम्मान करना सिखाया जाता है, के खिलाफ काम करता है। प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल कहते हैं कि प्रधानमंत्री के पास किसानों का दर्द सुनने की फुर्सत नहीं है।
उत्तर प्रदेश के तूफानी चुनाव प्रचार की थकान राहुल केचेहरे पर साफ दिखाई देती है। लेकिन इसकेबावजूद अपनी बात कहने केलिए अमर उजाला के लिए कुछ वक्त निकाल ही लेते हैं। इस विशेष बातचीत में राहुल गांधी का मानना है कि उत्तर प्रदेश में नोटबंदी को लेकर लोगों में एक गुस्सेभरी खामोशी है। लोग महसूस कर रहे हैं कि उनके साथ धोखा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनका मजाक उड़ाए जाने और सोशल मीडिया में उन्हें लेकर चलने वाली चर्चा के सवाल पर राहुल कहते हैं कि हर व्यक्ति का अपना चरित्र होता है जिससे उसकी भाषा बनती है। इसलिए उन्हें इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें सिर्फ अपने काम से मतलब है।
'मोदी के दौर में नफरत की राजनीति'
राहुल गांधी
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राजनीतिक विरोध के राजनीतिक शत्रुता की हद तक पहुंचने को सही न मानते हुए राहुल कहते हैं कि जहां इंदिरा गांधी के जमाने में राजनीतिक विरोध के बावजूद निजी रिश्ते अच्छे रहते थे, वहीं सोनिया के प्रति वाजपेयी का व्यवहार भी राजनीतिक नापसंदगी का था, लेकिन इस हद तक नफरत का नहीं था जैसा कि मौजूदा प्रधानमंत्री मोदी के दौर में है। राहुल कहते हैं कि राजनीति में उनका कोई एक रोल मॉडल नहीं है, लेकिन गांधी जी से वह बहुत सीखते हैं। वैसे उनकी कोशिश हर बड़े नेता से कुछ न कुछ अच्छा सीखने की है।
अपनी अभिरुचियों का जिक्र करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष बताते हैं कि उन्हें इतिहास और सामयिक विषयों के साथ साथ धार्मिक पुस्तकें पढऩा भी अच्छा लगता है। उन्होंने उपनिषदों और गीता को पढ़कर यह पाया कि हिंदू धर्म में कही भी नफरत के लिए जगह नहीं है। वह कहते हैं कि उन्हें किसी खास तरह की छवि में कैद होना पसंद नहीं है बल्कि वह खोखले वादों की जगह ठोस काम करके अपने शब्दोंं को अर्थ देना चाहते हैं।