राहुल और चंद्रबाबू नायडू की बृहस्पतिवार को हुई मुलाकात से तेलंगाना में विपक्षी एकता की बुझती उम्मीदों को आशा की किरण दिख रही है। सीपीआई के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि संभव है कि दोनों नेताओं के बीच सीटों पर सहमति बन गई हो। वरना राजस्थान, छत्तीसगढ और मध्य प्रदेश की तरह तेलंगाना में भी विपक्षी एकता केवल मृग मरीचिका ही साबित होगी।
पांच कोणीय मुकाबले की संभावना
यदि इन दलों का कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं बन पाता है तो तेलंगाना में पांच दलों के बीच मुकाबले होंगे - टीआरएस, कांग्रेस, बीजेपी, टीडीपी-सीपीआई-टीजेएस गठबंधन के अलावा सीपीएम के नेतृत्व में बना स्वयंसेवी संगठनों का गठबंधन। तब सभी दलों का गणित बिगड़ सकता है।
पिछले चुनाव में टीआरएस को राज्य की 119 में से 63 सीटें मिली थीं। कांग्रेस 21, टीडीपी को 15, एआईएमआईएम को 7, बीजेपी को 5, वाईएसआर कांग्रेस को 3, बीएसपी को 2 और सीपीआई, सीपीएम और निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी।
लेकिन टीआरएस ने कांग्रेस के आठ, और टीडीपी के 13 विधायकों को तोड़ लिया था। साथ ही वाईएसआर कांग्रेस, बीएसपी और सीपीआई के सभी विधायकों के साथ एक निर्दलीय विधायक को भी दल बदल करा कर 119 सदस्यों की विधानसभा में टीआरएस के विधायकों की संख्या 90 पहुंचा दी।