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तेलंगाना में कांग्रेस विपक्षी महागठबंधन बनाने में सफल, टीडीपी, सीपीआई, बसपा और टीजेएस को जोड़ा

Wed, 12 Sep 2018 05:36 AM IST
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
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Rahul Gandhi, Chandrababu Naidu
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तेलंगाना विधानसभा भंग कर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने विपक्ष को चौंकाने की कोशिश सफल होती नजर नहीं आ रही है। भले ही कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन तैयार करने की कवायद परवान नहीं चढ़ पा रही हो, लेकिन तेलंगाना में एक सप्ताह के अंदर ही कांग्रेस ने तेलगू देशम पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और तेलंगाना जन समिति को जोड़कर एक महागठबंधन बनाने की तैयारी कर ली है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के अनुसार, शुरुआती सहमति के बाद अब सीटों के बंटवारे पर बातचीत चल रही है। जल्द ही गठबंधन की औपचारिक घोषणा हो सकती है।
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समय से आठ महीने पहले विधानसभा भंग कर मुख्यमंत्री केसीआर ने विपक्षी दलों को चुनावी तैयारी का मौका नहीं दिया। लेकिन इसके चलते एक होने की मजबूरी ने विपक्षी दलों के बीच दो-तीन बैठकों में ही सहमति बनवा दी है। कांग्रेस की ओर से राज्य के प्रभारी राम चंद्र खुंटिया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरत रेड्डी और विधानमंडल दल के नेता के. जना रेड्डी सीटों के बंटवारे पर टीडीपी के तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष एल. रमण, सीपीआई के नारायणन और तेलंगाना जन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर एम. कोडंडरम सीटों के बंटवारे में शामिल हैं। टीजेएस ने ही तेलंगाना के निर्माण के लिए आंदोलन किया था।

ये भी है एक बड़ा कारण

पिछले विधानसभा चुनाव में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को राज्य की 119 में से 63 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को 21, टीडीपी को 15, एआईएमआईएम को 7, भाजपा को 5, वाईएसआर कांग्रेस को 3, बसपा को 2 और सीपीआई, माकपा और निर्दलीय को एक-एक सीट मिलीं थीं। टीआरएस ने कांग्रेस के आठ और टीडीपी के 13 विधायकों को तोड़कर बहुमत जुटाया था। इसके लिए वाईएसआर कांग्रेस, बसपा और सीपीआई के सभी विधायकों के साथ एक निर्दलीय विधायक को दल-बदल के जरिए जोड़कर 119 सदस्यों की विधानसभा में  टीआरएस के विधायकों की संख्या 90 तक पहुंचा दी थी। इससे ये सभी दल नाराज चल रहे हैं। 
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चुनौती देने की संभावना फिर भी कम

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बढ़ेगी कांग्रेस की ताकत

तेलंगाना में अभी तक टीआरएस के लिए कांग्रेस ही मुख्य चुनौती थी। अन्य दलों में टीडीपी का प्रभुत्व तेलंगाना में केवल हैदराबाद और सिकंदराबाद के आसपास की उन 19-20 सीटों पर ही है, जहां आंध्र प्रदेश और तटवर्ती इलाकों के लोग कामकाज के सिलसिले में आकर बस गए हैं। वहीं टीजेएस और सीपीआई भी बहुत ज्यादा सीटें नहीं लड़ पाएंगी। लेकिन इन दलों को साथ जोड़ लेने से कांग्रेस की ताकत में जरूर इजाफा होने जा रहा है।

चुनौती देने की संभावना फिर भी कम

माकपा ने इस महागठबंधन से बाहर रहने का फैसला किया है। वह कुछ स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर अलग चुनाव लड़ेगी। साथ ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) ने हैदराबाद की सात सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। 15 सितंबर को अमित शाह के तेलंगाना दौरे के साथ ही भाजपा का चुनावी अभियान भी शुरू हो जाएगा। यानी लाख कोशिश के बाद भी महागठबंधन टीआरएस को सीधी चुनौती नहीं दे पाएगा।

एमपी-राजस्थान में भी गठबंधन जल्द

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इतनी तेजी से तेलंगाना में गठबंधन बनाने के सकारात्मक परिणाम उन्हें मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी मिलेंगे। उन्हें उम्मीद है कि अब इन राज्यों के लिए भी बीएसपी के साथ सीटों का बंटवारा जल्द ही तय कर लिया जाएगा। 
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