तेलंगाना विधानसभा भंग कर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने विपक्ष को चौंकाने की कोशिश सफल होती नजर नहीं आ रही है। भले ही कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन तैयार करने की कवायद परवान नहीं चढ़ पा रही हो, लेकिन तेलंगाना में एक सप्ताह के अंदर ही कांग्रेस ने तेलगू देशम पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और तेलंगाना जन समिति को जोड़कर एक महागठबंधन बनाने की तैयारी कर ली है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के अनुसार, शुरुआती सहमति के बाद अब सीटों के बंटवारे पर बातचीत चल रही है। जल्द ही गठबंधन की औपचारिक घोषणा हो सकती है।
समय से आठ महीने पहले विधानसभा भंग कर मुख्यमंत्री केसीआर ने विपक्षी दलों को चुनावी तैयारी का मौका नहीं दिया। लेकिन इसके चलते एक होने की मजबूरी ने विपक्षी दलों के बीच दो-तीन बैठकों में ही सहमति बनवा दी है। कांग्रेस की ओर से राज्य के प्रभारी राम चंद्र खुंटिया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरत रेड्डी और विधानमंडल दल के नेता के. जना रेड्डी सीटों के बंटवारे पर टीडीपी के तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष एल. रमण, सीपीआई के नारायणन और तेलंगाना जन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर एम. कोडंडरम सीटों के बंटवारे में शामिल हैं। टीजेएस ने ही तेलंगाना के निर्माण के लिए आंदोलन किया था।
ये भी है एक बड़ा कारण
पिछले विधानसभा चुनाव में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को राज्य की 119 में से 63 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को 21, टीडीपी को 15, एआईएमआईएम को 7, भाजपा को 5, वाईएसआर कांग्रेस को 3, बसपा को 2 और सीपीआई, माकपा और निर्दलीय को एक-एक सीट मिलीं थीं। टीआरएस ने कांग्रेस के आठ और टीडीपी के 13 विधायकों को तोड़कर बहुमत जुटाया था। इसके लिए वाईएसआर कांग्रेस, बसपा और सीपीआई के सभी विधायकों के साथ एक निर्दलीय विधायक को दल-बदल के जरिए जोड़कर 119 सदस्यों की विधानसभा में टीआरएस के विधायकों की संख्या 90 तक पहुंचा दी थी। इससे ये सभी दल नाराज चल रहे हैं।