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Congress: 'इस्राइल के प्रति अंधभक्ति छोड़ें पीएम मोदी', कांग्रेस ने विदेश नीति पर सरकार को क्या दी सलाह?

Mon, 15 Jun 2026 12:29 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को अब इस्राइल को एकतरफा समर्थन देने के बजाय संतुलित विदेश नीति अपनानी चाहिए। 
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पीएम मोदी और पीएम नेतन्याहू - फोटो : ANI
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विस्तार
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कांग्रेस ने सोमवार को मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नया प्रभाव बना लिया है और यह भारत के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को रोकने के लिए 19 जून को जिनेवा में होने वाला समझौता स्वागतयोग्य है, हालांकि इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
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पाकिस्तान को लेकर क्या बोले जयराम रमेश?
रमेश ने दावा किया कि 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता हासिल की थी, वह स्थिति अब बदलती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नया प्रभाव हासिल करता नजर आ रहा है। चीन की पाकिस्तान की रणनीतिक भागीदारी भारत की विदेश नीति के सामने एक बड़ी भू-राजनीतिक चुनौती है।'

इस्राइल को समर्थन पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनसे इस्राइल के प्रति अपने रुख पर पुनर्विचार की उम्मीद करना शायद बहुत ज्यादा होगा, लेकिन भारत के राष्ट्रीय हित संतुलित विदेश नीति की मांग करते हैं। उन्होंने कहा, 'मानवीय मूल्यों और भारत की दीर्घकालिक विदेश नीति के अलावा भी राष्ट्रीय हित यह मांग करता है कि सरकार इस्राइल के प्रति अंधभक्ति छोड़ें और अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाए।'
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शहबाज शरीफ के बयान के बाद आई प्रतिक्रिया
कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है और 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होंगे।

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होर्मुज खुलने से राहत, लेकिन अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बरकरार
जयराम रमेश ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने से भारत को निश्चित रूप से राहत मिलेगी, लेकिन इससे यह नहीं माना जाना चाहिए कि भारतीय अर्थव्यवस्था की परेशानियां जल्द समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। रुपये पर दबाव बढ़ रहा था, डॉलर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा था और निजी निवेश की रफ्तार लंबे समय से सुस्त बनी हुई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मजदूरी में बढ़ोतरी न होने, चीन से आयातित वस्तुओं की डंपिंग पर रोक लगाने में सरकार की विफलता और जांच एजेंसियों तथा कर अधिकारियों को मिले असीमित अधिकारों ने निवेश माहौल को प्रभावित किया है।
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कैसे शुरू हुआ पश्चिम एशिया संघर्ष?
बीती 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इस संघर्ष में ईरान के कई शीर्ष नेताओं की मौत हुई, जिनमें पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारिजानी, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपुर और रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह शामिल बताए गए। खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई अब सर्वोच्च नेता की भूमिका में हैं, हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद से वे सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।
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