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गुजरात में अपने विधायकों के पाला बदलने से डरी कांग्रेस, बचे विधायकों को भेजेगी राजस्थान के रिसॉर्ट

Tue, 09 Jun 2020 04:52 AM IST
श्रीधर मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
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(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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गुजरात कांग्रेस अपने सभी विधायकों को पड़ोसी राज्य राजस्थान के सिरोही जिले में आबू रोड स्थित एक रिसॉर्ट भेजेगी। उसने यह फैसला राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा की तरफ से पार्टी विधायकों की खरीद फरोख्त को देखते हुए लिया है। राज्यसभा की चार सीटों के लिए 19 जून को चुनाव होना है। पिछले हफ्ते पार्टी के तीन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था। इससे 182 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी के विधायकों की संख्या 65 रह गई है।  

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पार्टी विधायकों के इस्तीफे को देखते हुए कांग्रेस ने अपने अन्य विधायकों को जोनवार समूहों में गुजरात के विभिन्न रिसॉर्ट में भेजा था। रविवार रात को पार्टी ने उत्तरी गुजरात क्षेत्र के 20 से अधिक विधायकों को सिरोही में एक रिसॉर्ट भेजा। हालांकि अब पार्टी ने सभी विधायकों को सिरोही में आबू रोड स्थित एक रिसॉर्ट में भेजने का निर्णय लिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई विधायक पहले ही पहुंच चुके हैं और अन्य सोमवार शाम तक वहां पहुंच जाएंगे।  

दूसरी राज्यसभा सीट जीतने में आ सकती है मुश्किल

कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए शक्तिसिन्ह गोहिल और भरतसिन्ह सोलंकी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, लेकिन पार्टी विधायकों की संख्या 65 रह जाने से उसके दूसरी सीट जीतने पर संकट पैदा हो गया है। पार्टी नेता सत्तारूढ़ भाजपा पर विधायकों को ब्लैकमेल, धमकाने और पैसों के दम पर अपने पाले में लाने का आरोप लगा रहे हैं। भाजपा ने अभय भारद्वाज, रामिलाबेन बारा और नरहरि अमीन को उम्मीदवार बनाया है।  
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फिर फंसेगा पेच

182 सदस्यीय विधानसभा में 10 सीटें खाली हैं। इससे विधानसभा की मौजूदा ताकत 172 विधायकों की है। नियमानुसार, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को एकल हस्तांतरित वोट के तहत 36 वोट की जरूरत पड़ेगी। भाजपा के 103 विधायक हैं और वह दो सीट आसानी से हासिल कर लेगी, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे दूसरी पार्टी के विधायकों की जरूरत पड़ेगी। कांग्रेस बीटीपी के दो, एनसीपी के एक और एक निर्दलीय विधायक के समर्थन से दो सीटों पर जीत हासिल करने को लेकर आश्वस्त थी, लेकिन पार्टी के तीन विधायकों के इस्तीफे से उसकी रणनीति डगमगा गई है। 2017 में भाजपा ने अतिरिक्त उम्मीदवार खड़ा कर कांग्रेस नेता अहमद पटेल की सीट फंसा दी थी। उस वक्त पार्टी के 6 विधायकों ने चुनाव से पहले इस्तीफा दे दिया था, लेकिन एक वोट रद्द होने से किसी तरह से पटेल जीत सके थे।

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