जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन के टूटने के लिए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सैफुद्दीन सोज ने भाजपा को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2019 के आम चुनावों को देखते हुए भाजपा ने यह फैसला लिया है। जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ नेता सैफुद्दीन सोज ने कहा कि राज्य में घृणा, नफरत और सांप्रदायिक विभाजन करने वाली राजनीति को हराने के लिए धर्मनिरपेक्ष ताकतों को ऐसे नाजुक मोड़ पर एकजुट हो जाना चाहिए।
सौज ने एक बयान देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद मुझे भरोसा है कि जम्मू-कश्मीर राज्य के लोग इस तर्क को समझें कि गठबंधन से बाहर निकलने के पीछे मोदी-अमित शाह का दिमाग है। उन्होंने कहा कि उन्हें घबराहट है कि आगामी 2019 के आम चुनावों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी पूरे देश के विपक्ष को एकजुट कर रही है, जो प्रधानमंत्री मोदी के लिए काफी कठिन साबित होने वाला है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूरे देश के विपक्ष में राहुल गांधी को लेकर उनकी स्वीकार्यता बन रही है, उससे बीजेपी के वरिष्ठ नेता घबराए हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज के वक्त में अगर पीएम मोदी कोई भी फैसला लेते हैं, उसे आगमी चुनावों से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
सोज के मुताबिक भाजपा नेताओं की घबराहट का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि राज्य के विकास को लेकर उनकी कोई सोच नहीं है। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन भाजपा का एजेंडा सांप्रदायिकता पर समाज का ध्रुवीकरण करना है और इसके लिए वे जम्मू को अपने शुरुआती "युद्ध मैदान" के रूप में चुन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि बीजेपी के बॉसेज को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से भारत को कितना नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितयों को मैं 'चुनौती' के तौर पर देखता है, साथ ही जम्मू-कश्मीर राज्य के बेहतर भविष्य और विकास के लिए राज्य की धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट होने का यह एक 'मौका' भी है।