संसद में पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों पर चर्चा के लिए समय न मिलने पर कांग्रेस ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस कर पूछा कि केंद्र ने पेट्रोलियम उत्पादों से वसूले 21 लाख करोड़ कर को किस कल्याणकारी योजना में खर्च किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, संसद में इसका हिसाब लेना चाहते थे। विपक्ष को ऐसे बहुत सवाल पूछने थे। लेकिन सरकार ने सदन में मौका नहीं दिया।
खरगे ने कहा, सरकार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को घटाने की भी कोशिश नहीं कर रही है। एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर पेट्रोल-डीजल इतना मंहगा कर दिया है कि भारत के इतिहास में कभी ये दरें नहीं रहीं। यूपीए सरकार में जब कच्चे तेल की कीमत 109 से 140 डॉलर प्रति बैरल रही तब भी 71 रुपए से अधिक पेट्रोल नहीं दिया।
गरीबों के इस्तेमाल का केरोसीन 14 से 35 रुपए पंहुच गया है। उन्होंने कहा, सरकार ने उज्ज्वला योजना का जमकर प्रचार किया। अब उस गैस सिलेंडर की कीमत साढ़े पांच सौ है। मोदी जी का स्टाइल है सभी पेट्रोल पंप पर अपनी फोटो लगाकर प्रचार किया अब वैसा ही प्रचार कोरोना वैक्सीन को लेकर कर रहे हैं।
जब देश के नागरिक सुखी और संपन्न होंगे तभी लोकतंत्र बचता है। हम सदन में संविधान और नियम के तहत विषय उठा रहे थे, उत्तर देने को तैयार नहीं हैं। खरगे ने आरोप लगाया कि जनता को गरीबी से मुक्त करने के बजाय उसे और धकेल जा रहा है। पीएम चंद मालदार लोग और कॉरपोरेट को खुश करना चाहते हैं।
शेरो-शायरी से मोदी पर तंज
खरगे ने शयराना अंदाज में कहा, अब कोई और न धोखा देगा, इतनी उम्मीद तो वापस कर दे, हमसे हर ख्वाब छीनने वाले हमारी नींद तो वापस कर दे। वहीं राज्यसभा में उपनेता आनंद शर्मा ने कहा, विपक्ष किसानों के मुद्दे पर भी सरकार से जवाब चाहती थी क्योंकि अगर विपक्ष की मांग मानकर बिल स्टैंडिंग कमेटी के पास जांच के लिए भेजा जाता तो यह नौबत ही नहीं आती। सरकार ने संसद के नियम और परंपराओं को दरकिनार कर विपक्ष की डिवीजन की मांग न मानते हुए इसे कानून बना दिया।