मुंबई : शिवसेना ने सीबीआई निदेशक के तौर पर बहाल किए गए आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने के फैसले के बहाने एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला बोला है। शिवसेना ने इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि सरकार ने वर्मा को अपना बचाव करने का मौका न देकर गलत परंपरा शुरू की है। वहीं, राफेल मुद्दे पर राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए शिवसेना ने कहा है कि मोदी के वकीलों के पास कांग्रेस अध्यक्ष के सवालों का जवाब नहीं है।
शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र में ‘पहले सजा फिर अदालत सीबीआई का अंत’ नामक शीर्षक के तहत संपादकीय में लिखा है कि राफेल सौदे को लेकर आरोपों से बचने के लिए जब प्रधानमंत्री अपने बचाव के लिए हर मंच का प्रयोग कर सकते हैं तो यही मौका अपदस्थ सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को क्यों नही दिया गया। पूरे प्रकरण का संदर्भ देते हुए पार्टी ने पूछा कि क्या उन्हें इसलिए हटाया गया, क्योंकि राफेल सौदे में वो सरकार को कटघरे में खड़ा कर सकते थे।
शिवसेना ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का समर्थन हासिल करने वाले अस्थाना ने सीबीआई को सरकार का गुलाम बनाने की कोशिश की। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा सीबीआई प्रमुख के पद से स्थानांतरित कर दमकल सेवा, सिविल डिफेंस एवं होम गार्ड का महानिदेशक बनाए जाने के एक दिन बाद ही वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था।