'नोटबंदी की मोदी निर्मित आपदा' ने अकेले 1.5 करोड़ नौकरियां छीन लीं और देश की जीडीपी को दो फीसद नीचे गिरा दिया। इससे छोटे व मंझोले धंधों को तीन लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके साथ त्रुटिपूर्ण जीएसटी के चलते कारोबार बर्बाद हुआ और नौकरियां खत्म हो गईं। सीएमआईई के अनुसार, भारत में अकेले 2018 में 1.1 करोड़ नौकरियों का नुकसान हुआ।
भारत के गांवों में स्थिति ज्यादा गंभीर रही। गांवों में अनुमानित 91 लाख नौकरियां खत्म हुईं और शहरों में लगभग 18 लाख नौकरियां खत्म हो गईं। 88 लाख से अधिक महिलाओं की नौकरियां पिछले साल गईं, जो कुल खोई नौकरियों की 80% हैं। रेलवे की 90 हजार नौकरियों के लिए 2.8 करोड़ युवाओं ने आवेदन दिया, जिनमें अनेक पीएचडी/एमए/एमएससी/एमफिल उपाधिधारक भी थे।
यूपी में चपरासी के 386 पदों के लिए 23,00,000 युवाओं ने आवेदन किया। महाराष्ट्र में कांस्टेबल के 1137 पदों के लिए बीई/एमबीए/एलएलबी/एमबीबीएस उपाधिधारक 2,00,000 युवाओं ने आवेदन किया।हरियाणा में चपरासी/माली/चौकीदार के 18000 पदों के लिए पीएचडी/एमएससी/एमए (मेकेनिकल)/एमबीए/एलएलबी योग्यता वाले 18 लाख युवाओं ने आवेदन किया।
'कांग्रेस नौकरियों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है'
भारत में नई नौकरियों की वार्षिक मांग अनुमानित रूप से 1.2 करोड़ प्रतिवर्ष है, लेकिन नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं। मोदी सरकार ने असंगठित क्षेत्र, खेती-बाड़ी और एमएसएमई को बर्बाद कर दिया, जहां 90 फीसदी नौकरियां निर्मित होती हैं। कांग्रेस पार्टी खेती-बाड़ी, असंगठित क्षेत्र और एमएसएमई को अपने नौकरी निर्माण के एजेंडे के केंद्र में रखेगी। इसके अलावा पूंजी, निवेश एवं उचित रियायतों द्वारा संगठित क्षेत्र के तीव्र विस्तार के लिए काम करेगी।