किसी को समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं मिलता। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य राजीव शुक्ला पर यह कहावत सटीक बैठ रही है। आखिरी समय में उनके पास कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यालय से राज्यसभा का नामंकन करने का फोन आया, लेकिन समय इतना कम था कि अवसर की गाड़ी छूट गई। यानी गुजरात जाना और नामांकन कर पाना नामुमकिन था। अब उन्हें राज्यसभा सदस्य बनने के लिए भाग्य के अगले पड़ाव तक कुछ दिन इंतजार पड़ सकता है।
कांग्रेस पार्टी ने 11 मार्च को नारायण भाई राठवा को गुजरात से राज्यसभा में भेजने की सूची जारी की, लेकिन सूत्र बताते हैं कि राठवा के पास नामांकन के लिए दस्तावेज पूरे नहीं पा रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए कांग्रेस ने सीट को खाली न छोडऩे का मन बनाते हुए राजीव शुक्ला को गुजरात से राज्यसभा में लाने का मन बनाया। रणनीतिक कारणों से भी राजीव शुक्ला इसके लिए उपयुक्त थे। उनमें ही तेजी से अपना दस्तावेज तैयार कराकर गुजरात पहुंचने की ज्यादा संभावना भी थी, लेकिन फिर भी समय बहुत कम था।
बताते हैं इस असमंजस की स्थिति से शुक्ला को काफी समय तक दो चार होना पड़ा। वह थोड़े समय तक हां-ना की स्थिति में फंसे थे। यह कांग्रेस मुख्यालय के लिए भी कठिन समय था, लेकिन थोड़ी ही देर में राठवा की तरफ से दस्तावेज पूरा होने की सूचना आ गई।
इससे पहले भी राजीव शुक्ला को कर्नाटक या किसी अन्य राज्य से राज्यसभा में लाने की जोरदार मशक्कत हुई, लेकिन बताते हैं कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक जायज कारण रखा। इस कारण को राहुल गांधी भी ना नहीं कर सके। सिद्धारमैया का कहना था कि उनके राज्य में चुनाव होना है।
भाजपा के साथ कड़े मुकाबले की स्थिति बन रही है। ऐसे में कर्नाटक से बाहर के व्यक्ति को राज्यसभा के लिए चुनने पर उनके लिए परेशानी बढ़ सकती है। बताते हैं सिद्धारमैया के इस तर्क को कुछ अन्य राज्यों में भी आधार बनाया। कांग्रेस ने कुल 12 सीटों के लिए राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किए हैं। इनमें कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को ही केंद्रीय पश्चिम बंगाल से उतारा जा सका है।