पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से ऋण मिलने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड की बैठक में अमेरिकी दबाव के आगे झुक गयी। सरकार ने बैठक में पाकिस्तान को ऋण देने पर चल रही चर्चा में जोरदार विरोध नहीं किया।
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अब पाकिस्तान को ऋण देने के लिए आईएमएफ की आलोचना कर रहे हैं, लेकिन 29 अप्रैल को ही मोदी सरकार के जागने से पहले ही कांग्रेस ने कहा था कि आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड इस मुद्दे पर विचार करने के लिए नौ मई को बैठक कर रहा है और भारत को इसका जोरदार विरोध करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि मुझे पता लगा है कि भारत ने केवल 9 मई को ही मतदान में हिस्सा नहीं लिया था। बाद में मोदी सरकार के समर्थकों, जय-जयकार करने वालों और सरकार का बचाव करने वालों ने तर्क दिया कि भारत के पास इसके अलावा कोई और विकल्प ही नहीं था।यह सरासर झूठ है।
जयराम रमेश ने कहा कि आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड में 'नहीं' के पक्ष में मतदान करने का प्रावधान है। रूस ने सितंबर 2016 में यूक्रेन को ऋण देने के प्रस्ताव पर 'नहीं' वोट दिया था और भारत ने स्वयं 11 सितंबर 2005 को जिम्बाब्वे के निष्कासन के मुद्दे पर 'नहीं' वोट दिया था। जहां चाह, वहां राह, लेकिन मोदी सरकार नौ मई को आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड की बैठक में अमेरिकी दबाव के आगे झुक गई।
राजनाथ सिंह ने की थी आईएमएफ से पुनर्विचार करने की अपील
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर फिर से पुनर्विचार करने की अपील की थी। केंद्रीय मंत्री ने आशंका जताई थी कि पाकिस्तान इस राशि का दुरुपयोग आतंकी गतिविधियों को संचालित करने में कर सकता है। पाकिस्तान सरकार ने मुरीदके और बहावलपुर में स्थित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की है।
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उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को दी जाने वाली कोई भी वित्तीय सहायता आतंकवाद के वित्तपोषण से कम नहीं है। नौ मई को वाशिंगटन में बोर्ड बैठक में आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वित्तपोषण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण राशि को मंजूरी दी थी।
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