नागपुर उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस का गृह जिला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस का भी ये गढ़ माना जाता है। कांग्रेस के मजबूत होते इन कदमों को भाजपा के लिए खतरे की घंटी के रूप में भी देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र में सियासी उठापटक के बाद बनी भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट की सरकार के बाद भी नागपुर में कांग्रेस का दबदबा कायम है। नागपुर में भले ही संघ का मुख्यालय हो लेकिन यहां जिला परिषद के चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए चुने गए हैं। जिसके चलते कांग्रेस ने नागपुर जिला परिषद पर अपना कब्जा बरकरार रखा है।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिला परिषद सदस्यों की विशेष आम सभा की बैठक के दौरान कांग्रेस की मुक्ता कोकर्डे को अध्यक्ष और कुंडा राउत को उपाध्यक्ष चुना गया। उन्होंने बताया कि 57 सदस्यों वाली इस जिला परिषद सदस्यों की आम सभा की विशेष बैठक में हुए चुनावों में मुक्ता कोकर्डे को 39 वोट जबकि कुंडा राउत को 38 वोट मिले।
गौरतलब है कि निवर्तमान जिला परिषद अध्यक्ष रश्मि बर्वे ने पांच साल के कार्यकाल के ढाई साल पूरे किए। रश्मि बर्वे भी कांग्रेस नेता हैं। बता दें कि भाजपा ने इस चुनाव के लिए अपने किसी उम्मीदवार को नहीं उतारा था। वहीं,इस मौके पर पूर्व मंत्री और नागपुर कांग्रेस की ग्रामीण इकाई के प्रमुख राजेंद्र मुलक ने पार्टी के उम्मीदवारों की जीत को ऐतिहासिक बताते हुए दावा किया कि भाजपा नागपुर में हार रही है।
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गौरतलब है कि नागपुर उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस का गृह जिला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस का भी ये गढ़ माना जाता है। कांग्रेस के मजबूत होते इन कदमों को भाजपा के लिए खतरे की घंटी के रूप में भी देखा जा रहा है।
वीबीए ने जीता अकोला जिला परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद
वहीं, अकोला जिला परिषद में वंचित बहुजन अघाड़ी को सफलता मिली है। यहां वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) की संगीता अधाऊ और सुनील फातकर को अकोला जिला परिषद का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुना गया। एक अधिकारी ने बताया कि 53 में से 48 जिला परिषद सदस्यों ने मतदान किया। जिसके चलते वीबीए को 25 और महा विकास अघाड़ी को 23 वोट मिले। जबकि भारतीय जनता पार्टी के पांच सदस्यों ने चुनाव में भाग नहीं लिया।