दस साल से मिजोरम में शासन कर रही कांग्रेस पूर्वोत्तर के अपने इस आखिरी गढ़ को किसी भी हालत में बचाना चाहती है। इसके लिए वह मुख्यमंत्री का पद छोड़ने को भी तैयार है। पार्टी ने एग्जिट पोल के नतीजों को खारिज करते हुए भरोसा जताया है कि वह लगातार तीसरी बार यहां सरकार बनाएगी। गौरतलब है कि सभी सर्वे एजेंसियों के परिणाम राज्य में त्रिशंकु विधानसभा बता रहे हैं। साथ ही मुख्य विपक्षी दल पूर्व मुख्यमंत्री जोरामथंगा के नेतृत्व वाले मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) को बड़ी संख्या में सीटें मिलने की बात कही जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता लालियान छुंगा ने यहां बताया कि वर्ष 2013 के चुनावों में भी एग्जिट पोल के नतीजे गलत साबित हुए थे। तब कांग्रेस को 19 सीटें जीतने की भविष्यवाणी की गई थी। लेकिन पार्टी को 40 में से 34 सीटें मिली थीं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी को 23 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। इस सवाल पर कि उसे अकेले बहुमत नहीं मिला तो, इस पर उनका कहना था कि एमएनएफ के साथ हाथ मिलाने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। लेकिन हमने दूसरे सहयोगियों के लिए पार्टी के दरवाजे खुले रखे हैं।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की उम्मीदें जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) पर टिकी हैं। यही वजह है कि चुनाव प्रचार के दौरान भी कांग्रेस नेताओं ने जेडपीएम पर हमले नहीं किए। छुंगा ने कहा कि 11 दिसंबर को नतीजे सामने आने के बाद कोई रणनीति बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ललथनहवला पहले ही कह चुके हैं कि कांग्रेस समान विचारधारा वाले दलों के साथ हाथ मिलाने के लिए तैयार है।