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कांग्रेस ने PM को घेरा: नारी शक्ति वंदन कानून पर यू-टर्न का आरोप, कहा- बिना जनगणना आरक्षण लागू करने की तैयारी

Wed, 25 Mar 2026 09:03 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस ने केंद्र सरकार को नारी शक्ति वंदन कानून के अलावा आरक्षण और जनगणना के मुद्दे पर भी घेरा। पार्टी महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर लिखे विस्तृत पोस्ट में सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने परिसीमन पर भी तीखे सवाल पूछे। कांग्रेस ने किन मुद्दों पर सरकार के साथ-साथ पीएम मोदी को भी घेरा? जानिए इस खबर में
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जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के मकसद से बनाए जा रहे कानून- नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर यू टर्न लेने का आरोप लगाते हुए पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर विस्तृत पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा, सितंबर 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन नारी वंदन अधिनियम 2023 के पारित होने के साथ हुआ था। इस अधिनियम ने संविधान में संशोधन कर लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने की बात थी।
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सरकार पर साधा निशाना
जयराम रमेश आगे कहा, यह आरक्षण परिसीमन और जनगणना अभ्यास पूरा होने के बाद ही लागू होना था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनावों से इसे तत्काल लागू करने की मांग की थी। तब मोदी सरकार ने कहा था कि परिसीमन और जनगणना के बिना यह संभव नहीं है। अब, 30 महीने बाद, 'यू-टर्न उस्ताद' ने अचानक अपना मन बदल लिया है और वह परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही आरक्षण लागू करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, यह कदम विदेशी नीति की विफलताओं और देश के एलपीजी व ऊर्जा संकट से ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया है। सरकार नारी वंदन अधिनियम, 2023 में आवश्यक संशोधन पारित करने के लिए अगले दो सप्ताह में दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। इससे सरकार को पूरा राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
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आरक्षण के क्रियान्वयन पर सवाल
अप्रैल में विशेष सत्र बुलाना चुनाव आयोग की आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगा। यह कदम जाति जनगणना कराने की सरकार की वास्तविक प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाता है। सरकार ने अप्रैल 2025 में जाति जनगणना की घोषणा की थी। इससे पहले कांग्रेस नेताओं को इस मांग पर शहरी नक्सली मानसिकता का आरोप लगाया गया था। यह विरोधाभास सरकार की मंशा पर संदेह पैदा करता है।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को पत्र लिखकर 29 अप्रैल को वर्तमान विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा होनी चाहिए। मोदी सरकार लोकसभा और विधानसभाओं का आकार 50 फीसदी बढ़ाने की भी योजना बना रही है। इस पर भी सावधानीपूर्वक विचार की आवश्यकता है। यह महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव बिना व्यापक सहमति के नहीं होने चाहिए।

बिल तुरंत पेश करने की संभावना कम
सूत्रों के अनुसार, सरकार मौजूदा संसद सत्र में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने वाला बिल तुरंत पेश करने की संभावना कम ही है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित करना है। खबर है कि संसद का यह सत्र 2 अप्रैल की तय तारीख से पहले ही स्थगित हो सकता है। हालांकि, सत्र को पूरी तरह समाप्त (सत्रावसान) नहीं किया जाएगा, ताकि विधानसभा चुनावों के बाद इसे फिर से बुलाया जा सके।
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जानकारी के मुताबिक, बुधवार को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस बिल का कोई प्रस्ताव शामिल नहीं है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस विषय पर एनडीए के साथियों और कुछ विपक्षी दलों से बात की है, लेकिन कांग्रेस और टीएमसी से अभी चर्चा नहीं हुई है। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून 2023 में ही बन गया था, लेकिन इसे परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू किया जाना है।

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