कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्रीय परिवहन मंत्री के निजी सचिव वैभव डांगे की कंपनी के बहाने नितिन गडकरी और सुरेश प्रभु को कठघरे में खड़ा किया। उसने डांगे की कंपनी इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (आईएफजीई) के जीरो बैलेंस से चार सालों में डेढ़ करोड़ नकद और मंत्रालय से मिल रहे समर्थन पर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि नवंबर 2013 में खुली इस कंपनी में 50 प्रतिशत का मालिकाना हक गडकरी के निजी सचिव डांगे का है। पार्टी ने पूछा है कि क्या केंद्र सरकार का यही स्टार्टअप इंडिया है।
पढ़ें- देशभर में अप्रैल से शुरू होगा ई-टोल सिस्टम: गडकरी
पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रवक्ता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि गडकरी और प्रभु का डांगे की कंपनी में सदस्य होना आचार संहिता का खुला उल्लंघन और स्वार्थों का विरोधाभास है। गडकरी को इस बारे में स्पष्टीकरण और डांगे को निजी सचिव पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बेटे शौर्य डोभाल की कंपनी से तीन मंत्री सुरेश प्रभु, जयंत सिन्हा और निर्मला सीतारमण के जुड़ाव पर भी प्रधानमंत्री ने चुप्पी साध रखी है।