ओडिशा में कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी’ (केआईआईटी) में नेपाली छात्रा के आत्महत्या और संस्थान से नेपाली छात्रों को बाहर निकाले जाने के मामले को लेकर शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केआईआईटी के संस्थापक अच्युत सामंत की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के युवा और छात्र कार्यकर्ताओं ने केआईआईटी के गेट पर सामंत का पुतला जलाया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संस्थान में घुसने की कोशिश की तो उनकी सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई हो गई। वहीं राज्य सरकार ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
ओडिशा में एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज की बीटेक तृतीय वर्ष की नेपाली छात्रा प्रकृति लामसाल ने अपने छात्रावास में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। संस्थान में तनाव के बाद सोमवार को नेपाल के छात्रों के एक समूह को परिसर से बाहर निकाल दिया गया था। इसके बाद नेपाल के पीएम ने सख्ती जताई थी। मामले को लेकर शुक्रवार को विधानसभा ने कांग्रेस विधायकों ने मामने की न्यायिक जांच की मांग की थी।
राज्य सरकार करेगी कड़ी कार्रवाई: उच्च शिक्षा मंत्री
ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि राज्य सरकार केआईआईटी घटना में कड़ी कार्रवाई करेगी। सरकार को उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। केआईआईटी के संस्थापक सहित आठ शीर्ष पदाधिकारियों ने जांच समिति के सामने बयान दर्ज कराए हैं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार कार्रवाई शुरू करेगी।
मंत्री ने कहा कि पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। अब तक संस्थान के बाउंसरों, सुरक्षा गार्डों और अन्य अधिकारियों सहित कम से कम 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से मिले साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई की। छात्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।
मंत्री ने कहा कि पुलिस को एक वायरल ऑडियो क्लिप भी मिला है। इसकी प्रामाणिकता का पता लगाने के लिए इसे वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफ टेस्ट के लिए भेज दिया है। अगर यह सही पाया गया तो आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज किया जाएगा।
मामले को लेकर ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने नेपाल की विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा से फोन पर बात की। उनको राज्य सरकार की कार्रवाई की जानकारी दी गई।
नेपाल की विदेश मंत्री की निष्पक्ष जांच की मांग
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान नेपाल की विदेश मंत्री आरज़ू राणा देउबा ने एक नेपाली छात्रा की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि आज मेरी ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी के साथ टेलीफोन पर बातचीत हुई। मैंने केआईआईटी विवि ओडिशा में नेपाली छात्रा प्रकृति की मौत और उसके बाद की स्थिति से संबंधित मामलों पर चर्चा की। मैंने छात्रा की मौत की निष्पक्ष जांच करने, दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और नेपाली छात्रों की कक्षाएं फिर से शुरू करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि नेपाली छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले केआईआईटी के कुछ कर्मचारियों और शिक्षकों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन मैंने उनसे उन्हें स्थायी रूप से नौकरी से हटाने का अनुरोध किया है। देउबा ने मुख्यमंत्री से कॉलेज द्वारा गठित जांच समिति और नई दिल्ली में नेपाली दूतावास द्वारा जांच की निगरानी के लिए नियुक्त राजनयिकों के साथ समन्वय करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री माझी ने मुझे आश्वासन दिया है कि ओडिशा सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और घटना की जांच के लिए गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने प्रकृति को न्याय दिलाने और दोषी को दंडित करने के लिए अपना काम शुरू कर दिया है। माझी ने सूचित किया कि ओडिशा सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी कि नेपाली छात्र सुरक्षित वातावरण में अपनी कक्षाएं फिर से शुरू कर सकें। नेपाली विदेश मंत्रालय और नई दिल्ली में नेपाली दूतावास इस मामले में ओडिशा सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन और भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल
घटना को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और ओडिशा के पूर्व मुख्य सचिव बिजय पटनायक ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केआईआईटी में छात्रों के बीच नस्ली भेदभाव हो रहा है। निजी संस्थान के कर्मचारियों ने नेपाल के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने घटना पर यूजीसी और केंद्र सरकार की चुप्पी को लेकर हैरानी जताई।
पटनायक ने आरोप लगाया कि केआईआईटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए और यह बताना चाहिए कि नस्लीय और भेदभावपूर्ण गतिविधियों के लिए उसका मानित विश्वविद्यालय दर्जा क्यों वापस नहीं लिया जाए? केआईआईटी की घटनाओं ने राज्य का नाम खराब किया है। अब विदेशी छात्र और उनके माता-पिता अपने बच्चों को ओडिशा में पढ़ने के लिए भेजने से पहले कई बार सोचेंगे।
उन्होंने यह भी कि विदेशी छात्रों से शिकायतें प्राप्त करने के लिए यहां गवर्नर हाउस में एक विशेष सेल खोला जाना चाहिए। केआईआईटी संस्थापक बीजेडी सांसद थे और इसलिए उन्हें पिछली सरकार से संरक्षण मिला हुआ था। केआईआईटी घटना नई भाजपा सरकार के लिए यह साबित करने की चुनौती बन गई है कि वह बीजद सरकार से अलग है।
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