नवनियुक्त कांग्रेस महासचिव कमलनाथ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पंजाब प्रभारी का पद भी छोड़ दिया है। कमलनाथ के इस्तीफे को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जिस त्वरित गति से मंजूर किया उससे लगता है कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देश से ही कमलनाथ ने पद से इस्तीफा दिया है।
राज्य सभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस आलाकमान ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के प्रभारियों को हटाकर नई नियुक्तियां की थी। कमलनाथ को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी और अन्य दल कांग्रेस पर सवाल खड़े करने लगे थे। 1984 के सिख दंगों में कमलनाथ की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। कमलनाथ ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि वे इन आरोपों से आहत हुए हैं, इसलिए पद छोड़ रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि पंजाब चुनाव में विवादों से बचने के लिए आलाकमान ने कमलनाथ को नियुक्ति के चार दिनों के अंदर ही हटाने का निर्णय दिया। कमलनाथ के महासचिव पद और पंजाब प्रभारी पद छोड़ने के बाद कांग्रेस की इस सियासी गलती में सुधार तो हुआ है लेकिन पंजाब चुनाव में अकाली दल, भाजपा और आप को एक नया मुद्दा मिल गया है।
अजीत जोगी ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा
पहले ही नई पार्टी बनाने का एलान कर चुके छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने बुधवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। पार्टी बनाने के एलान के बाद उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति से बाहर कर दिया गया था। जोगी ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष को भेज दिया है।