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राहुल गांधी का हिंदुत्व सच्चा या फिर सत्ता में लौटने के लिए पाखंड?

Fri, 05 Oct 2018 07:48 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देवालय, शिवालय में जा रहे हैं। कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर रहे हैं और चित्रकूट गए। अब छह अक्टूबर को राहुल फिर मुरैना, गौरीघाट और जबलपुर जा रहे हैं। गौरीघाट में पूजन-अर्चन भी करेंगे। आखिर कांग्रेस अध्यक्ष अचानक एक साल से इतने धार्मिक क्यों हो गए हैं? इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रमुख राम बहादुर राय का कहना है कि कांग्रेस पर लंबे समय से मुस्लिम तुष्टिकरण का धब्बा लगता रहा है। अब कांग्रेस अध्यक्ष उसे एक झटके में धो देना चाहते हैं। ख्यातिलब्ध पत्रकार राहुल देव का भी कहना है कि सत्ता की चाहत जो न कराए। 

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अयोध्या में ताला किसने खुलवाया था : पूनिया

कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग में सचिव विनीत पूनिया का कहना है कि जो लोग राहुल गांधी के हिंदुत्व को मोटे चश्मे से देख रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि अयोध्या में राम मंदिर का ताला किसने खुलवाया था? वह तो पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ही थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पिता भी थे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का साधु संतों के संपर्क में रहना, उनका आदर करना, मंदिरों में जाना, रुद्राक्ष की माला पहनना कोई छिपी बात नहीं है। 

पूनिया का कहना है कि कोई हमें बताए पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कब कैलाश मान सरोवर की पवित्र धार्मिक यात्रा की थी। लोगों को जानकारी नहीं है तो कोई कुछ भी कह सकता है। सच यह है कि कांग्रेस जो करती है, उसका ढोंग नहीं करती है और करती जाती है। दिखावा या पाखंड में भरोसा नहीं करती। भाजपा और आरएसएस पाखंड करके दोहरा चरित्र दिखाते हैं। इतने सालों तक मुसलमान अछूत था और अचानक संघ प्रमुख मोहन भागवत का उसके लिए प्यार उमड़ आया है। जो कांग्रेस कहती, मानती आई अब वह संघ प्रमुख को भी सही लग रहा है।

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राहुल गांधी मजबूर हैं : राम बहादुर राय

राम बहादुर राय, राहुल गांधी के अचानक धार्मिक हो जाने का कारण अयोध्या आंदोलन और उसके बाद नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना बताते हैं। राय का कहना है कि इन दोनों स्थितियों ने उन्हें सॉफ्ट हिंदुत्व की लाइन पकड़ने पर मजबूर कर दिया है। राहुल गांधी जनेऊ पहन रहे हैं, शिवालय, देवालय जा रहे हैं, कलावा बांध रहे हैं, लाल टीका लगा रहे हैं और शिव तथा राम की भक्ति भी कर रहे हैं। राय ने कहा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष का भाषण सुन रहे थे। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान के विरोध में वह बोल रहे थे तो उनके भाषण में भी हिंदू धर्म और संस्कृति का पर्यावरण दर्शन था। यह बदली हुई परिस्थिति और मुस्लिम तुष्टीकरण के कांग्रेस के ऊपर लगे धब्बे को राहुल गांधी मिटाने की कोशिश कर रहे हैं।

नाटक और पाखंड : राहुल देव

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष पाखंड कर रहे हैं। कांग्रेस को यह समझने में काफी देर लग गई कि मुस्लिम परस्ती की उसकी नीतियों से बहुसंख्यक हिंदू समाज उससे किनारा कस रहा है। हिंदू समाज का भी मन बदला है। इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष को बदलना पड़ रहा है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि राहुल गांधी के भीतर आया यह बदलाव किस हद तक सच्चा है। क्योंकि राहुल गांधी के पारिवारिक आचरण में कभी हिंदूपन दिखा नहीं। हिंदू धर्म, संस्कृति, रीति, रिवाज से आस्था नहीं दिखी। राहुल गांधी के भीतर एक गंभीर राजनेता का लक्षण नहीं दिखाई देता। हालांकि उन्होंने खुद को पहले से काफी बेहतर बनाया है, लेकिन अभी उन्हें काफी कुछ साबित करना है।
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