कांग्रेस अध्यक्ष ने गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के मुताबिक, गुजरात में अब सात कार्यकारी अध्यक्ष होंगे। इस मामले में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। जिन विधायकों को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें ललित कगथारा, जिग्नेश मेवाणी, रुत्विक मकवाना, अंबरीश जे. देर, हिम्मतसिंह पटेल, कादिर पिर्जादा और इंद्रविजयसिंह गोहिल शामिल हैं। गुजरात में इस साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है।
कर्नाटक: प्रियांक खड़गे संचार और सोशल मीडिया इकाई के अध्यक्ष
वहीं, पार्टी ने तत्काल प्रभाव से प्रियांक खड़गे को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी की संचार और सोशल मीडिया इकाई के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की है। खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे हैं। वह कर्नाटक में विधायक हैं। पार्टी नेता मंसूर अली खान को संचार का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि दिनेश गुलिगौड़ा, एमएलसी और पूर्व एमएलसी रमेश बाबू को कर्नाटक में संचार का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। नागराज यादव, एमएलसी को दक्षिणी राज्य में मुख्य प्रवक्ता-सह-संयोजक (संचार) बनाया गया है। लावण्या बल्लाल, कविता रेड्डी, नागलक्ष्मी और ऐश्वर्या महादेव को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी में प्रवक्ता सह महासचिव, संचार नियुक्त किया गया है।
कर्नाटक: कांग्रेस कमेटी के वार रूम के अध्यक्ष बने शशिकांत
पार्टी की ओर से कहा गया कि एआईसीसी ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वार रूम के अध्यक्ष के रूप में शशिकांत सेंथिल की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। सुनील कानूनगोलू समग्र प्रभारी बने रहेंगे। केपीसीसी के उपाध्यक्ष सूरज हेगड़े और केपीसीसी के महासचिव मेहरोज खान वार रूम की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों का समन्वय करेंगे। कर्नाटक में अगले साल चुनाव होंगे और कांग्रेस भाजपा से सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है।
नड्डा से मुलाकात पर बोले आनंद शर्मा
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की खबरों पर बड़ा बयान दिया। नड्डा के साथ मुलाकात करने की जानकारी पर आनंद शर्मा ने कहा कि मैं इस अफवाह को सम्मानित करूंगा। जहां तक मिलने की बात है तो जेपी नड्डा और मैं तो एक ही प्रांत (हिमाचल प्रदेश) के हैं और एक ही विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और हमारे सामाजिक और पारिवारिक संबंध भी है। तो जब मुझे मिलना होगा तो मैं खुला मिल लूंगा। अगर हमारे राजनीतिक दल अलग है और उनकी विचारधारा तथा मेरी विचारधारा अलग है तो इसका ये मतलब नहीं कि हम सामाजिक रूप में बंटे हुए हैं। तो इस पर अफवाह फैलाना उचित नहीं है। हमारे बच्चे तो मिलते रहते हैं।