Congress President Election: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और मल्लिकार्जुन खरगे।
- फोटो : ANI
कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन और पार्टी की कमान मल्लिकार्जुन खरगे के हाथ में जाने की संभावना से वामपंथी पार्टियों और क्षेत्रीय दलों में 2024 चुनाव से पहले एक बड़े गठबंधन की उम्मीद बढ़ने लगी है। खड़गे के बारे में वामपंथियों की राय काफी सकारात्मक है। खासकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता इसे एक बेहतर बदलाव मानते हैं। हालांकि वह यह भी कहते हैं कि यह कांग्रेस पार्टी का अंदरूनी मामला है, लेकिन भाकपा महासचिव डी राजा और माकपा नेता सीताराम यचुरी मानते हैं कि खरगे एक गैर विवादास्पद और सम्मानित नेता रहे हैं और उनके रिश्ते सबसे बेहतर हैं।
डी राजा फिलहाल अपनी पार्टी के अधिवेशन के सिलसिले में केरल में हैं और कहते हैं कि खड़गे की छवि बहुत अच्छी है, उनके आने से कांग्रेस जैसी सबसे पुरानी पार्टी के साथ ही भाजपा विरोधी गठबंधन की भी मजबूती की उम्मीद है। बेशक खरगे दक्षिण भारत से हैं, लेकिन वह हिंदी अच्छी जानते हैं, समझते हैं और बोलते भी हैं। साथ ही उत्तर भारत में भी उनकी छवि अच्छी है। कांग्रेस पिछले कई सालों से जिस सांगठनिक परेशानियों की वजह से कमजोर होती गई, शायद खरगे के आने के बाद उसमें सुधार भी आए और उम्मीद की जानी चाहिए कि महागठबंधन के विस्तार को लेकर जो उलझनें हैं, वह भी दूर होंगी। इस समय हम सबका पहला मकसद एक ही है – 2024 में हर हाल में भाजपा और संघ परिवार को सत्ता से हटाना।
माकपा नेता सीताराम यचूरी के खड़गे अच्छे मित्र हैं, अकसर मिलते रहते हैं। पार्टियां बेशक अलग हों, लेकिन सबकी चिंता का विषय और लक्ष्य एक ही है। केरल की राजनीति को अगर किनारे कर दें, तो राष्ट्रीय स्तर पर वामपंथियों और कांग्रेस को साथ आने में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने भी फिर से अपने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अखिलेश यादव और लालू प्रसाद यादव को इस भरोसे के साथ जिम्मेदारी दे दी है कि आने वाले वक्त में जनता दल (यू) के नीतीश कुमार, लालू यादव, अखिलेश यादव और वामपंथी पार्टियों के साथ तालमेल के अलावा कांग्रेस को भी इस मोर्चे से जोड़ लिया जाएगा। उधर एनसीपी के शरद यादव तो साथ हैं ही। दक्षिण की प्रमुख पार्टियां भी महागठबंधन के साथ हैं। ऐसे में खड़गे को लेकर इन दलों में भी भीतर ही भीतर उत्साह है और उम्मीद भी। डी राजा कहते हैं कि फिलहाल उनका ध्यान अपनी पार्टी कांग्रेस पर है लेकिन 14 अक्तूबर को इसमें सभी विपक्षी पार्टियों को न्यौता दिया गया है। वामपंथी नेता चाहते हैं कि कांग्रेस का भी कोई न कोई प्रतिनिधि पहले दिन भाजपा और संघ के खिलाफ होने वाले सम्मेलन में शामिल हो।