मनरेगा का नाम बदलने को लेकर जारी सियासत के बीच कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के विचारों से जुड़ी योजना थी, जिसने 20 साल तक गरीबों को 100 दिन का काम दिया। नाम हटाने से गांधी को नहीं मिटाया जा सकता, जनता इसका जवाब देगी।
मनरेगा योजना के नाम को लेकर इन दिनों देशभर की सियासत में गर्माहट तेज हो गई है। ऐसे में अब इस मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में पास किए गए VB-G RAM G बिल से कांग्रेस को चोट लगी है। इस बिल के जरिए मनरेगा की जगह नई योजना लाई गई और महात्मा गांधी का नाम हटा दिया गया। खुर्शीद ने कहा कि महात्मा गांधी हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे और उनका नाम मिटाया नहीं जा सकता।
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उन्होंने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं थी, बल्कि महात्मा गांधी के नाम और उनके आंदोलन से जुड़ी थी। यह योजना गरीबों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार साल में 100 दिन काम देने का वादा करती थी और बीते 20 वर्षों तक सफल रही। लेकिन अब नए बिल में यह अधिकार अधिकारियों को दे दिया गया है और गांव के लोगों के पास यह निर्णय लेने का हक नहीं रहेगा।
नई योजना को लेकर क्या बोले खुर्शीद
सलमान खुर्शीद ने आगे बताया कि नई योजना में केवल 60% फंड केंद्र सरकार देगी और शेष 40% राज्यों को देना होगा। इस बदलाव से 12 करोड़ कामगार प्रभावित होंगे। इस दौरान कांग्रेस नेता ने नेशनल हेराल्ड केस पर भी सरकार पर हमला किया। उनका कहना था कि कुछ लोग इस मामले को ऐसे पेश करना चाहते थे कि लोग इसे घोटाला समझें। उन्होंने कहा कि ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन अदालत ने ईडी की चार्जशीट को खारिज कर दिया।
सरकार लोकतंत्र के सबसे बड़े अधिकार में दखल दे रही- खुर्शीद
सलमान खुर्शीद ने आगे इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्र सरकार लोकतंत्र के सबसे बड़े अधिकार यानी वोट देने के अधिकार में दखल दे रही है। इसके खिलाफ कांग्रेस ने 'वोट चोरी' आंदोलन शुरू किया है, जो अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस लड़ाई को मजबूती से जारी रखेगी।
इसके साथ ही अंत में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा को जल्द वापस लाने की भी उम्मीद जताई। उनका कहना था कि लोकतंत्र में किसी राज्य की पहचान और राज्य के दर्जे को कम करना सबसे बड़ा अन्याय है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य के दर्जे को वापस करने का वादा किया था, लेकिन अभी तक यह पूरा नहीं हुआ।