कांग्रेस ने अपने 84वें महाधिवेशन में गठबंधन की राजनीति को और मजबूती देने घोषणा की है। पार्टी की ओर से पेश राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि सभी समान विचारधारा वाले दलों के सहयोग को व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। 2019 के आम चुनावों में भाजपा-संघ को हराने के लिए साझा कार्यप्रणाली विकसित की जाएगी। इसका पहला प्रयोग कर्नाटक में आने वाले विधानसभा चुनाव में होगा।
अधिवेशन में चुनाव के दौरान
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मैदान पर काम करने की जरूरत पर भी बल दिया गया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रस्ताव पेश करते हुए कर्नाटक से आए कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें घर-घर जाकर वोटरों को तैयार करना होगा।
राजनीतिक प्रस्ताव में महिला सशिक्तकरण, युवा, सामाजिक न्याय, दलितों, आदिवासियों एवं अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, संघ-भाजपा, भ्रष्टाचार, आंतरिक और बाहरी सुरक्षा का बिगड़ता माहौल, आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा, न्यायपालिका, दसवीं अनुसूची, चुनाव संचालन, एक साथ चुनाव और मीडिया की निष्पक्षता और तानाशाही राज में आवाज को दबाने के प्रयास जैसे मुद्दों के जरिये केंद्र सरकार पर हमला बोला गया है। इसमें कहा गया कि आज संवैधानिक मूल्यों की बुनियाद के लिए खतरा पैदा हो गया है। हमारे संस्थानों पर भारी दबाव है। उनकी आजादी से समझौता हो रहा है।
एक साथ लोकसभा-विधानसभा चुनाव भाजपा की चाल
पार्टी के प्रस्ताव में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने को भाजपा की चाल बताया गया है। पार्टी ने इस पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। प्रस्ताव में चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी कुछ आशंकाएं जताई गई और कहा गया कि निर्वाचन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को मतपत्र के पुराने तरीके को फिर से लागू करना चाहिए।