भाजपा के आक्रामक प्रचार के चलते केरल की पारंपरिक द्विध्रुवीय राजनीति के बीच कई जगहों पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बन रही है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट जीतकर खाता खोला, तो दिसंबर में पहली बार तिरुवनंतपुरम नगर निगम का चुनाव भी जीत लिया। इससे उत्साहित भाजपा कुछ सीटें जीतकर राज्य में निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है।
केरलम में आगामी विधानसभा चुनाव में होने वाले सियासी दंगल को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। इस बीच कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने दावा किया है कि कांग्रेस की इंदिरा गारंटी केरल में आगामी चुनावों में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभर रही है। उन्होंने बताया कि पार्टी के उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान घर-घर जाकर गारंटी कार्ड वितरित कर रहे हैं।
महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा: सरकारी बसों में सभी महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा।
स्वास्थ्य बीमा: ओमान चांडी स्वास्थ्य बीमा के तहत सभी परिवारों को 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज।
छात्राओं के लिए वित्तीय सहायता: कॉलेज जाने वाली सभी लड़कियों को प्रति माह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता।
कल्याण पेंशन में वृद्धि: कल्याण पेंशन को बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह करना।
युवाओं के लिए ब्याज-मुक्त ऋण: युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण।
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पूरी की जाएंगी सभी गारंटियां :वेणुगोपाल
के.सी. वेणुगोपाल ने इन गारंटियों को पवित्र बताते हुए कहा कि कांग्रेस सत्ता में आते ही इन्हें पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि ठीक वैसे ही जैसे उसने कर्नाटक और तेलंगाना में किया था। उन्होंने विश्वास जताया कि इंदिरा गारंटी केरल में पार्टी की जीत सुनिश्चित करेगी।
केरलम में सत्ता बदलने की परंपरा
केरलम में वैसे तो सत्ता बदलने की परंपरा रही है, मगर एलडीएफ ने पिछले चुनाव में पारंपरिक प्रवृत्ति को तोड़ दिया और पी. विजयन के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की थी। वर्तमान परिदृश्य में एलडीएफ अपनी विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे व कल्याणकारी कार्यक्रमों के आधार पर फिर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश में है।
एलडीएफ के खिलाफ कांग्रेस आक्रामक
वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ आर्थिक चुनौतियों, बेरोजगारी व प्रशासनिक मुद्दों पर हमलावर है। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन आक्रामक हैं। वहीं, सियासी जमीन मजबूत करने में जुटी भाजपा मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटा है। पिछले चुनाव में उसे एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी, लेकिन कई क्षेत्रों में उसका वोट प्रतिशत बढ़ा था।