आज जब पूरा देश हमारे वीर सैन्य अफसरों तथा सैनिकों की शहादत पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहा है, तो स्वाभाविक तौर पर देशवासियों के मन में अत्यंत पीड़ा भी है, आक्रोश भी और गुस्सा भी। अब यह साफ है कि चीन ने अक्षम्य अपराध किया है। चीनी सैनिकों ने राईफल की संगीनों, लोहे की रॉड, कंटीली बाड़ वाली लाठियों, डंडों व अन्य हथियारों से जानबूझकर हमारे जांबाज सैन्य अधिकारी व सैनिकों पर हमला किया।
130 करोड़ देशवासियों का मन यह सोचकर कांप उठता है कि जिस निर्दयता और निमर्मतापूर्वक तरीके से हमारे वीर जवानों को चीन द्वारा शहीद किया गया, वह सबसे अधिक आवेशित करने वाली, नामंजूर व तकलीफदेह बात है।
आज हर मन में वेदना और हर जुबान पर भारी रोष है। पूरे देश को न केवल इस बात की नाकाबिले बर्दाश्त पीड़ा है कि भारत मां के रणबांकुरों की निमर्मतापूर्वक शहादत हुई, अपितु इस बात का आक्रोश भी है कि उन्हें चीन से निहत्थे लोहा लेने के लिए क्यों व किसने बाध्य किया।
- क्या प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री देश को जवाब देंगे?
- हमारे जांबाज सैन्य अधिकारी व सैनिकों को दुश्मन के पास निहत्थे क्यों भेजा गया?
- किस हुक्मरान ने हमारे सैन्य अधिकारी व सैनिकों को यह आदेश दिया?
- जब हमारे सैन्य अधिकारी व सैनिकों को बगैर हथियार भेजा जा रहा था, तो आर्मी प्रोटोकॉल के अनुरूप उनकी सुरक्षा के लिए हथियारबंद ‘बैकअप फोर्स’ क्यों उपलब्ध नहीं थी? यदि बैकअप फोर्स थी, तो उसे क्यों नहीं भेजा गया?
- चीन के शत्रुतापूर्ण मनसूबों व हमारे शूरवीरों पर षड़यंत्रकारी तौर से हमला करने के बारे में अग्रिम जानकारी व सूचना सरकार के पास क्यों नहीं थी?
- क्या चीन की मंशा समझने में भारी चूक केंद्रीय सरकार व उनके नेतृत्व की घोर विफलता का प्रतीक नहीं?
आज हर मन इस बात से बेहद व्यथित है कि दिन-रात खुद के ‘मजबूत नेतृत्व’ का ढोल पीटने वाले दिल्ली के हुक्मरानों की कूटनीतिक चूक की कीमत देश को सैन्य अधिकारी व सैनिकों की शहादत से चुकानी पड़ी।