कोरोना वायरस से देश में उत्पन्न हालात पर सरकार को घेरते हुए बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष ने सरकार से लॉकडाउन के कारण हुए फायदे और नुकसान का ब्यौरा देश के सामने रखने की मांग की।
कोविड-19 महामारी और इस संबंध में भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम के बारे में स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के बयान पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने कहा कि इससे पहले विश्व ने पिछली शताब्दी में एक महामारी का सामना किया था जिसका नाम था, ‘स्पेनिश फ्लू’। उन्होंने कहा कि इससे विश्व के अन्य हिस्सों के साथ-साथ भारत में भी बड़ी संख्या में लोगों ने जान गंवाईं थीं।
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस जब आया तो शुरू में पूरे विश्व में भय का माहौल बन गया जो आज तक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि शुरुआती दो महीनों में यूरोप एवं अमेरिका सहित विभिन्न देशों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।
कांग्रेस नेता ने कहा कि आज डॉक्टरों, नर्सों सहित हमारे चिकित्सा समुदाय की इस संक्रमण से निबटने के बारे में समझ बहुत बेहतर हुई है, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई नई दवा विकसित नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री ने जो बयान दिया, उसमें ताजा आंकड़े नहीं दिए गए। पुराने आंकड़े दिए हैं।
शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने बयान में बताया कि भारत में प्रति दस लाख संक्रमित व्यक्तियों पर 55 लोगों की मौत हुई है जो विश्व में सबसे कम है। कांग्रेस सदस्य ने सरकार का ध्यान दिलाया कि श्रीलंका समेत कई दक्षिण एशियाई देशों में मरने वालों की संख्या इससे काफी कम है।
उन्होंने कहा कि कई अफ्रीकी देशों में भी यह दर काफी कम है। उन्होंने सरकार से यह जानना चाहा कि जिन देशों में बीसीजी के टीके लगाए गए थे, वहां क्या कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वाले लोगों की दर कम है?
शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन की पहली बार जो घोषणा की, उसके लिए सरकार ने कितनी तैयारी की थी? उन्होंने कहा कि देश की जनता को यह पता चलना चाहिए कि लॉकडाउन की वजह से कितना फायदा हुआ और कितना नुकसान हुआ?