संसद के विशेष सत्र से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे विपक्षी दलों की बैठक बुला रहे हैं। इसमें महिला आरक्षण कानून और परिसीमन पर संयुक्त रणनीति बनाई जाएगी। सरकार द्वारा प्रस्तावित सीट बढ़ोतरी और 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है।
संसद के विशेष सत्र से पहले राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे विपक्षी दलों की अहम बैठक बुलाने जा रहे हैं, जिसमें महिला आरक्षण कानून और परिसीमन जैसे बड़े मुद्दों पर संयुक्त रणनीति बनाई जाएगी। इस बैठक को संसद में सरकार को घेरने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। खरगे पहले अपने आवास पर कांग्रेस नेताओं के साथ आंतरिक बैठक करेंगे, जिसमें राहुल गांधी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। इसके बाद दोपहर में विपक्षी दलों की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें कई प्रमुख दल हिस्सा लेंगे या अपने प्रतिनिधि भेजेंगे। इस बैठक में सरकार के प्रस्तावित बिलों पर चर्चा और आगे की रणनीति तय की जाएगी।
क्या महिला आरक्षण कानून पर बनेगा बड़ा मुद्दा?
संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़े संशोधन बिल लाए जाएंगे। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक की जा सकती है, ताकि 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया जा सके। विपक्ष इस प्रस्ताव के इरादे और प्रभाव पर सवाल उठा रहा है।
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क्या परिसीमन पर भी बढ़ेगा टकराव?
परिसीमन यानी सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। यह प्रक्रिया जनगणना के आधार पर की जाएगी, जिससे कई राज्यों में सीटों की संख्या बदल सकती है। विपक्ष को आशंका है कि इससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
क्या कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार के बिल का उद्देश्य और सामग्री दोनों संदिग्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे संसदीय लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर जल्दबाजी में फैसला नहीं होना चाहिए।
क्या चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी?
देश के कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, ऐसे में यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। पुदुचेरी, असम और केरल में मतदान हो चुका है, जबकि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव होने बाकी हैं। ऐसे में संसद और चुनावी राजनीति दोनों में यह मुद्दा अहम भूमिका निभा सकता है। 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले विशेष सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष इस बैठक के जरिए अपनी रणनीति को मजबूत कर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन सकता है।