कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने संविधान को खारिज किया, उनके वंशज आज उसका जश्न मना रहे हैं और उसका बचाव कर रहे हैं। थरूर ने इसे जीत बताते हुए आरएसएस के पूर्वजों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस के पूर्वजों ने संविधान की जड़ से लेकर शाखा तक को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह गलत भाषा में लिखा गया है और इसमें पश्चिमी विचार समाहित हैं। थरूर अपनी पुस्तक 'अवर लिविंग कॉन्स्टिट्यूशन' के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे।
पुस्तक के विमोचन अवसर पर बोलते हुए थरूर ने कहा कि समाज और संविधान दोनों ही विकसित हो रहे हैं। हम धीरे-धीरे भारत के सामाजिक ताने-बाने में सांविधानिक मूल्यों और नैतिकता का समावेश देख रहे हैं। थरूर ने आगे कहा कि आज हिंदुत्व आंदोलन से जुड़े लोग संविधान के सबसे कट्टर समर्थक और रक्षक हैं। प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि यह एकमात्र पवित्र पुस्तक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने भी संविधान के प्रति समर्थन और निष्ठा का संकल्प लिया है और इसकी रक्षा करने की बात की है।
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आरएसएस के पूर्वजों के वंशज ही आज संविधान की शपथ ले रहे
कांग्रेस सांसद थरूर ने आगे कहा कि पहले आरएसएस के पूर्वजों ने संविधान को यह कहकर खारिज कर दिया था कि यह पश्चिमी विचारों से भरा है और इसमें भारतीयता की कमी है, लेकिन आज उनके बौद्धिक वैचारिक वंशज ही संविधान की शपथ लेते हैं और उसका बचाव करते हैं। थरूर ने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि वह भी विकसित हुए हैं और समाज भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि निर्णय बदल गए हैं, 106 संशोधनों के साथ हमारी व्याख्याएं बदल गई हैं और यही वास्तव में संविधान की ताकत है।
संविधान के मूल्य-नैतिकता को समझ रहे आम भारतीय
तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने माना कि देश में बहुत सी चीजें गलत हुई हैं। आगे और भी खराब हो सकती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जो चीजें सही हो रही हैं, उनमें से एक यह है कि आम भारतीय अब संविधान के मूल्य, नैतिकता और आकांक्षाओं को समझने लगे हैं। थरूर ने कहा कि यह बहुत बड़ी जीत है कि जिस पार्टी पूर्वज संविधान के खिलाफ थे, आज वही पार्टी संविधान की 75वीं वर्षगांठ मना रही है। थरूर ने कहा, 'जिस तरह से भारत एक देश के रूप में एक तरह से एक पार्टी के शासन में जश्न मनाने में सक्षम हुआ है, जिसके पूर्वज संविधान के खिलाफ थे, उसी संविधान की 75वीं वर्षगांठ, मुझे लगता है कि यह एक जबरदस्त जीत है।'
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पुस्तक में संविधान के विभिन्न भागों का वर्णन किया
थरूर ने अपनी पुस्तक में संविधान के विभिन्न भागों का वर्णन किया है, जो इसकी प्रस्तावना से शुरू होता है और फिर इसकी ऐतिहासिक जड़ों की व्याख्या करता है। पुस्तक में नागरिक राष्ट्रवाद की खोज की गई है, जिसने भारत के संस्थापकों को प्रेरित किया, जिसने संविधान को प्रगतिशीलता, बहुलवाद, सहिष्णुता, उदारवाद और व्यक्ति के प्रति चिंता से भर दिया। इस कार्यक्रम में पूर्व कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल, लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकुर और स्तंभकार शुभ्रास्था ने भाग लिया।
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