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Karnataka: कांग्रेस बना रही टीपू सुल्तान की मूर्ति लगाने की योजना, भाजपा समेत दक्षिणपंथी समूहों ने किया विरोध

Sat, 12 Nov 2022 11:09 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैसूर

सार

कांग्रेस नेता ने टीपू सुल्तान की प्रतिमा स्थापित करने की योजना को लेकर उस समय बयान दिया है जब कल यानी शुक्रवार को पीएम मोदी ने राज्य की राजधानी बैंगलुरू में नादप्रभु केंपेगौड़ा की 108 फीट की प्रतिमा का अनावरण किया था। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार, किसी शहर के संस्थापक की यह पहली और सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा है। इसे समृद्धि की मूर्ति कहा जाता है।  
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टीपू सुल्तान - फोटो : SELF
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विस्तार
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कर्नाटक कांग्रेस  मैसूर या श्रीरंगपट्ट्नम में टीपू सुल्तान की मूर्ति लगाने की योजना बना रही है। शनिवार को इस बारे में मैसूर में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री तनवीर सैत ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारी 18वीं शताब्दी के शासक टीपू सुल्तान की 100 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। उनके इस कदम का कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने स्वागत किया है। वहीं, भाजपा ने इसकी आलोचना की है। राज्य के मंत्री और भाजपा नेता सी एन अश्वथ नारायण ने कहा कि कर्नाटक में ऐसा कभी नहीं हो सकता है।

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कांग्रेस बना रही टीपू सुल्तान की प्रतिमा स्थापित करने की योजना
मौसूर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कांग्रेस नेता तनवीर सैत ने कहा कि टीपू सुल्तान की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर शीघ्र ही समुदाय के नेताओं से वार्ता करके निर्णय लिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वे अकेले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समुदाय के नेताओं के साथ, मूर्तियों को स्थापित करने पर अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध, मूर्ति की स्थापना के लिए अनुमति और उसके स्वरूप आदि के विषय में विमर्थ किया जाएगा। 

उन्होंने आगे कहा कि प्रतिमा स्थापित करने के पीछे उनका उद्धेश्य लोगों, खासकर युवाओं को टीपू सुल्तान के शासन की वास्तविकताओं और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के बारे में बताना है। उन्होंने कहा कि 'इस्लाम में मूर्तियां स्थापित करने की कोई अनुमति नहीं है। अगर इसकी अनुमति होती, तो हर जगह मूर्तियां होतीं। इसके बावजूद, मैंने टीपू के शासन को प्रकाश में लाने के इरादे से ऐसा कहा है। जो एक लोकतांत्रिक सरकार का मॉडल था।'
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गौरतलब है कि कांग्रेस नेता ने टीपू सुल्तान की प्रतिमा स्थापित करने की योजना को लेकर उस समय बयान दिया है जब कल यानी शुक्रवार को पीएम मोदी ने राज्य की राजधानी बैंगलुरू में नादप्रभु केंपेगौड़ा की 108 फीट की प्रतिमा का अनावरण किया था। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार, किसी शहर के संस्थापक की यह पहली और सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा है। इसे समृद्धि की मूर्ति कहा जाता है।  

 भाजपा ने दी चेतावनी
कांग्रेस नेता के इस प्रस्ताव का विरोध होना भी शुरू हो गया है। भाजपा और कई दक्षिणपंथी समूहों ने टीपू की प्रतिमा के प्रस्ताव का विरोध किया है। श्रीराम सेना प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने तो यहां तक चेतावनी दी है कि इसे बाबरी मस्जिद की तरह ही ध्वस्त कर दिया जाएगा। वहीं, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि भाजपा की राय स्पष्ट है कि टीपू सुल्तान एक धार्मिक कट्टर, हिंदू विरोधी और कन्नड़ विरोधी शासक था। उन्होंने कहा कि सरकार सही समय पर इस चाल का जवाब देगी। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस और सरकारी व्यवस्था है। किसी भी प्रतिमा की स्थापना के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता होती है। उन्हें इस तरह के प्रस्ताव के साथ आने दें। वहीं, राज्य के मंत्री अश्वथ नारायण ने कहा कि टीपू की प्रतिमा स्थापित करना सपना ही रहेगा। कर्नाटक में ऐसा कभी नहीं हो सकता। उन्हें इसे कहीं और करना होगा। 

विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने खड़ा किया सवाल
भाजपा के पलटवार के बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने सरकार से सवाल किया है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि 'टीपू की मूर्ति क्यों नहीं लगाई जानी चाहिए? उन्हें करने दें। क्या टीपू इसके लायक नहीं हैं?'  

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