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कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष नदीम जावेद से हाथापाई, एबीवीपी ने कहा- लोकप्रियता का हथकंडा

Wed, 12 Sep 2018 03:37 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राहुल गांधी के साथ नदीम जावेद - फोटो : Twitter
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कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष नदीम जावेद पर मंगलवार दोपहर को दिल्ली में हमला किया गया। वे उस समय इंडिया इस्लामिक सेंटर में कुछ लोगों से मुलाकात करने के लिए जा रहे थे। जावेद ने इस हमले की प्राथमिकी तुगलक रोड थाने में दर्ज करा दी है। वे इस समय सुरक्षित हैं। 
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नदीम जावेद ने अमर उजाला को बताया कि जैसे ही वे इस्लामिक सेंटर के पास पहुंचे, कुछ लोगों ने आकर उनसे अभद्रता करने की कोशिश की। हालांकि उनके सुरक्षा गार्ड उस समय उनके साथ ही थे, इसलिए वे कुछ विशेष नहीं कर पाए और उन्हें वहां से भागना पड़ा। जावेद के मुताबिक यह फांसीवादी ताकतों द्वारा उन्हें डराने की कोशिश है और इस तरह उन्हें चुप कराने की कोशिश हो रही है। लेकिन वे पहले भी इस तरह के हमलों से नहीं डरे थे और आगे भी नहीं डरेंगे। 

कांग्रेस नेता के साथ यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव चल रहा है। बुधवार को डूसू के लिए वोट डाले जा रहे हैं। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की छात्र इकाई एबीवीपी और कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के बीच कड़ी टक्कर है। दोनों ही छात्र गुटों के बीच कई बार झड़प हुई है। इसके पहले रामजस कॉलेज और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भी दोनों गुटों के बीच टकराव हो चुका है। आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलजीत से भी अभद्रता किये जाने का मामला सामने आया था। 
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एबीवीपी ने कहा, प्रचार पाने का हथकंडा

DUSU ELECTION
कांग्रेस नेता पर हुए हमले पर अपनी प्रतिक्रिया में एबीवीपी की राष्ट्रीय मीडिया इंचार्ज मोनिका चौधरी ने कहा कि अगर ऐसा कुछ हुआ है तो वे इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती हैं। उन्होंने कहा कि, लेकिन जहां हमले की बात की जा रही है, वह अत्यंत महत्वपूर्ण इलाका है और ज्यादातर जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। ऐसे में यह आश्चर्यजनक है कि कांग्रेस नेता पर हुए हमले की कोई फुटेज सामने नहीं आई है। 

उन्होंने कहा कि एबीवीपी हिंसा की निंदा करती है और स्वछ राजनीति में यकीन करती है। आज पूरे देश में राष्ट्रवाद की आंधी चल रही है। राष्ट्रविरोधी लोगों का चेहरा बेनकाब हो गया है। चूंकि देश का युवा वर्ग इस पर सबसे ज्यादा मुखर हो कर बोल रहा है, एनएसयूआई और आइसा जैसे संगठनों को उनका समर्थन बेहद कम हो गया है और आज उनको अपने अस्तित्व का डर सताने लगा है।

यही कारण है कि झूठे हमलों की अफवाह फैलाकर छात्रों के बीच सहानुभूति बटोरने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने डूसू चुनाव में एबीवीपी के भारी जीत की संभावना भी जताई। 
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