दिल्ली विधानसभा के आगामी चुनाव को सीधे तौर पर सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में अपेक्षाकृत असफल रहने के बाद अरविंद केजरीवाल ने आक्रामक रणनीति अपनाई है और एक के बाद एक योजनाओं की घोषणा कर वे तेजी से अपनी जगह वापस पाने में जुटे हैं। वहीं भाजपा के पास केंद्र सरकार के कामकाज के साथ-साथ कुशल रणनीतिकार अमित शाह का साथ है, जिनके सहारे वह दिल्ली की सत्ता पर दुबारा काबिज होने का ख्वाब देख रही है।
शीला सरकार के कामकाज को भुनाने की तैयारी
सत्ता के इन दो मजबूत दावेदारों के बीच दिल्ली की राजनीति की सबसे मजबूत खिलाड़ी रह चुकी कांग्रेस कहां है? इस चुनाव में उसका ट्रंप कार्ड क्या होगा? नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने के बाद अब कांग्रेस नेताओं के पास इस सवाल का सटीक जवाब मिलता दिख रहा है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि उनकी पार्टी को दिल्ली की सत्ता से हटे महज छह साल ही हुए हैं। यह फासला राजनीति में केवल एक चुनाव से तय होता है। ऐसे में पार्टी के लिए बहुत चिंता की बात नहीं है।
लोगों के जेहन में अभी भी शीला दीक्षित सरकार के कामकाज का असर है और वह उसी पर अपना दांव खेलने की तैयारी कर रही है। असली चिंता पार्टी के सभी नेताओं को एक साथ लाने की है क्योंकि पिछले कुछ समय में पार्टी के बीच हुई गुटबंदी ने पार्टी को बहुत कमजोर किया है।
कहां से है उम्मीद
कांग्रेस के एक शीर्ष नेता ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा मीडिया के जरिए इस तरह का माहौल बनाना चाहती है, जैसे कि देश में उसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा रह गया है। जबकि सच्चाई यह है कि इसी दौर में कांग्रेस ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मजबूती के साथ सत्ता में वापसी की है। हरियाणा और महाराष्ट्र के हाल ही में संपन्न चुनावों में कांग्रेस अपनी सरकार भले ही न बना सकी हो, लेकिन दोनों ही राज्यों में जनता ने विकल्प की तलाश में उसकी ओर देखा है। शीर्ष नेता के मुताबिक अब जिम्मेदारी जनता की नहीं बल्कि हमारी (कांग्रेस) है कि वह उसकी उम्मीदों पर खरा उतरे। उन्होंने कहा कि हम अपनी इस जिम्मेदारी को बखूबी समझते हैं और अगले विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को दिखेगा।
हर वर्ग के लिए विशेष योजनाएं
पार्टी नेता के मुताबिक भाजपा और आप दोनों ही दल दिल्ली के विकास की बजाय जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर चुनाव जीतना चाहते हैं। लेकिन इस बार कांग्रेस ठोस योजनाओं के साथ जनता का विश्वास जीतने के इरादे से उतरेगी और सफलता हासिल करेगी। इसके लिए समाज के हर वर्ग का चयन कर उनके लिए विशेष योजनाएं पेश की जाएंगी। इसके लिए कांग्रेस शासित राज्यों के विकास मॉडल को जनता के सामने दिखाया जाएगा। छत्तीसगढ़, पंजाब और मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकारों की तर्ज पर समाज के हर वर्ग के लिए विशेष योजनाएं पेश की जाएंगी।
युवाओं-महिलाओं को जोड़ेंगे
कांग्रेस नेता के मुताबिक पार्टी जल्द ही युवाओं और महिलाओं को पार्टी से जोड़ने का एक अभियान शुरू करेगी। टिकट वितरण में भी जिन युवाओं और महिलाओं की मजबूत दावेदारी सामने आएगी, उस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।