राहुल गांधी ने जब अपना त्यागपत्र दिया तो उन्होंने इसके साथ एक पत्र भी सार्वजनिक किया था। इसमें अन्य बातों के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर बहुत कुछ कहा गया। राहुल की बातों का यही मतलब निकल रहा था कि पार्टी की हार की जिम्मेदारी सभी को समान रूप से लेनी चाहिए। मैं हार की जिम्मेदारी लेता हूं और त्यागपत्र दे रहा हूं, उनकी इस बात का अनुसरण 195 नेताओं ने किया।
खास बात है कि त्यागपत्र देने वाले नेताओं में अधिकांश युवा हैं। 70 साल से ऊपर के किसी भी नेता ने पद नहीं छोड़ा। ये नेता अपना पद बरकरार रखने के लिए केवल एक ही रट लगाए हैं कि राहुल ही पार्टी को संभालें। बता दें कि 1963 में भी कांग्रेस पार्टी में कुछ ऐसा ही संकट खड़ा हो गया था। उस वक्त पार्टी संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव करने के लिए वरिष्ठ नेताओं से त्यागपत्र देने का आग्रह किया गया। सभी वरिष्ठ नेताओं ने कामराज प्लान का अनुसरण किया और त्यागपत्र दे दिए।
बता दें कि कामराज तमिलनाडु के सीएम थे और उन्होंने दो अक्तूबर 1963 को त्यागपत्र दे दिया था। यहां तक कि जवाहर लाल नेहरू ने भी त्यागपत्र दिया, लेकिन पार्टी ने उनका त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया। अब उसी तरह पार्टी में 70 साल से ज्यादा आयु के नेताओं से पद छोड़ने के लिए कहा गया, लेकिन किसी ने यह बात नहीं मानी। इसी वजह से अब पार्टी नेतृत्व धीरे-धीरे इन नेताओं को भाजपा के मार्गदर्शक मंडल की तरह पदमुक्त करेगा।
मोतीलाल वोरा, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, डॉ. मनमोहन सिंह, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे, के सिद्धारमैया, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, तरुण गोगोई, हरीश रावत और ओमान चांडी आदि नेता सत्तर के पार हो चुके हैं। अशोक गहलोत भी इस सीमा के करीब हैं। कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता जैसे भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कैप्टन अमरेंद्र सिंह, सुशील कुमार शिंदे, पी चिदंबरम और कपिल सिब्बल भी सत्तर साल या उससे उपर जा चुके हैं।
दूसरी ओर राहुल गांधी ने इन नेताओं को धीरे से जोर का झटका देने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया और मिलिंद देवड़ा का इस्तीफा इसी तरफ इशारा कर रहा है। इन नेताओं ने इस्तीफा देने से पहले राहुल गांधी से बातचीत की थी। इस्तीफा देने के बाद मिलिंद का यह कहना कि अब वे केंद्र की राजनीति में काम करना चाहते हैं, उसी रणनीति का ही एक हिस्सा है।
अब धीरे-धीरे सभी राज्यों में कांग्रेस संगठन को दोबारा से खड़ा किया जाएगा। पार्टी को जो नया अध्यक्ष मिलेगा, उसकी आयु भी पचास के आसपास रहेगी। कांग्रेस के एक नेता का कहना है, अभी कोई भी वरिष्ठ नेता खुद से त्यागपत्र देने को तैयार नहीं है। कई नेता पार्टी में विद्रोह जैसी बात कर रहे हैं। राहुल गांधी इन सब बातों को ध्यान में रखकर ही अपने प्लान को आगे बढ़ा रहे हैं।