जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र अपनी बढ़ी हुई फीस वापस लेने के लिए सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। वहीं अब यह मामला राजनीतिक रंग लेता भी दिख रहा है। गुरुवार सुबह माता वैष्णो देवी के दर्शन करने पहुंचे कांग्रेस नेता सुभाष चोपड़ा ने दरबार में प्रार्थना की कि जेएनयू छात्रों की फीस कम हो और वे शांतिपूर्वक अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। उन्होंने वैष्णोधाम से ही अपने सहयोगियों को निर्देश देकर पार्टी के उन सभी नेताओं की आपात बैठक बुलाई जो पूर्व में दिल्ली विश्वविद्यालय या जेएनयू छात्रसंघ के नेता रहे हैं।
शाम को दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने इन नेताओं के साथ बैठक की और जेएनयू छात्रों का साथ देने का प्रस्ताव पास किया। छात्रों को यह आश्वासन भी दिया गया कि अगर सरकार फीस वापस लेने को तैयार नहीं होती है तो वे इसके लिए सड़कों पर भी उतरेंगे और छात्रों का पूर्ण समर्थन करेंगे। बता दें कि सुभाष चोपड़ा स्वयं भी सत्तर के दशक में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के नेता रहे हैं।
अहम प्रस्ताव पास
दरअसल, कांग्रेस के पास ऐसे नेताओं की कमी नहीं है जो छात्र राजनीति की भट्ठी से तपकर ऊंचे पदों पर पहुंचे हैं। गुरुवार की इस बैठक में नौ ऐसे नेता पहुंचे जो पूर्व में छात्र राजनीति में अपना नाम कमा चुके हैं। इनमें सुभाष चोपड़ा के अलावा हरिशंकर गुप्ता, अलका लांबा, अमित मलिक, नीतू वर्मा, रोहित चौधरी, रागिनी नायक, अमृता धवन और राकी तुसीर शामिल थे। इन सभी नेताओं ने प्रस्ताव पास कर यह तय किया कि अगर सरकार बढ़ी फीस वापस नहीं लेती है तो वे छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे।
छात्रों ने बताई अपनी कहानी
इस अवसर पर जेएनयू से कुछ छात्र दिल्ली प्रदेश कार्यालय पहुंचे और उन्होंने सुभाष चोपड़ा से मुलाकात कर अपनी परेशानी भी बताई। छात्रों ने बताया कि वे बहुत अमीर घरों से नहीं हैं। विश्वविद्यालय में रहने और भोजन की सुविधा मिलते रहने के बाद भी शेष खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल भरा काम होता है। लेकिन फीस के अचानक तीन गुना तक बढ़ा देने से आगे की पढ़ाई करना उनके लिए मुश्किल हो जाएगा।